Yuva Haryana : हरियाणा के नए विधानसभा भवन बनाने की योजना से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। इस नई अपडेट के अनुसार नई विधानसभा के प्रस्ताव पर ब्रेक लग गया है। इस योजना में कहां रुकावट आई है और इस बारे प्रदेश के नेताओं का क्या कहना है ? चलिए आपको बताते है…
जेजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अजय चौटाला ने कहा कि हरियाणा की नई विधानसभा बनाने के नाम पर भाजपा सरकार ने लोगों को सिर्फ झूंझना दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अगल से विधानसभा बनने की योजना को हरियाणा सरकार ने खारिज कर दिया है, ऐसे में अब स्पष्ट हो गया है कि हरियाणा की भाजपा सरकार ने धरातल पर कुछ नहीं किया और जनता को गुमराह किया है।
इनेलो राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने कहा कि बीजेपी हमें बांट कर आगे बढ़ रही है। चंडीगढ़ में नई विधानसभा भवन का मुद्दा लोगों का ध्यान भटकाने के लिए उठाया गया था और ये सब फालतू की बातें हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को यूटी का दर्जा मिला है, अगर वहां जाकर कहोगे कि चंडीगढ़ प्रदेश की राजधानी बनेगी, ये सिर्फ लोगों का ध्यान बांटने के लिए बोला जाता है।
हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा है कि पूर्व गठबंधन सरकार ने हरियाणा के लिए अलग से विधानसभा भवन और सचिवालय बनाने के लिए गंभीरता से कदम उठाए थे और इस योजना के लिए चंडीगढ़ में जमीन लेने को लेकर पंचकुला में जमीन देने पर भी सहमति बन गई थी। अब केंद्र सरकार द्वारा इस योजना पर रोक लगाना हरियाणा के हित में नहीं है और यह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बड़ी विफलता है।
पूर्व डिप्टी सीएम ने यह भी कहा कि सीएम केवल केंद्र के आगे नतमस्तक हो सकते है, लेकिन केंद्र से हरियाणा को हक दिलाने पर बात नहीं करेंगे। उन्होंने मांग करते हुए कहा कि हरियाणा सरकार को तुरंत केंद्र से अपना हक मांगना चाहिए।
वहीं पूर्व मंत्री एवं थानेसर से कांग्रेस विधायक अशोक अरोड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलाकर हरियाणा से अलग राजधानी की मांग के लिए फंड की मांग करनी चाहिए।
अरोड़ा ने कहा कि चंडीगढ़ हरियाणा और पंजाब की संयुक्त राजधानी है और दोनों प्रदेशों का 60-40 का अनुपात है। ऐसे में हैरत की बात है कि हरियाणा अपनी ही राजधानी में नया विधानसभा भवन नहीं बना सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला न केवल हरियाणा के हितों के खिलाफ है, बल्कि ढाई करोड़ जनता का भी अपमान है। इससे स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार चंडीगढ़ से हरियाणा का हक छीनना चाहती है।
आपको बता दें कि कई प्रमुख समाचार पत्रों के मुताबिक पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक और विवाद से बचने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने चंडीगढ़ में अलग विधानसभा भवन बनाने के हरियाणा सरकार के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।
जानकारी के अनुसार हरियाणा के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने यह मुद्दा उठाया था, जिस पर शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के साथ इस परियोजना को आगे न बढ़ाया जाए।
खबर में यह जानकारी भी दी गई है कि इस साल की शुरुआत में चंडीगढ़ प्रशासन ने नए विधानसभा भवन के लिए जमीन की अदला-बदली के हरियाणा के प्रस्ताव को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया था कि यूटी मास्टर प्लान-2031 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
आपको बता दें कि हरियाणा विधानसभा के तत्कालीन अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने साल 2022 की शुरुआत में चंडीगढ़ में नए विधानसभा भवन के लिए जमीन की मांग की थी।
उस समय यूटी प्रशासन ने हरियाणा सरकार को तीन जगहों पर जमीन की पेशकश की थी। यूटी द्वारा आईटी पार्क, मनीमाजरा में कलाग्राम और रेलवे लाइट पॉइंट से आईटी पार्क तक जाने वाली सड़क के पास जमीन की पेशकश की गई थी।
यहां तक कि ज्ञानचंद गुप्ता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ दौरे के बाद जून 2022 में रेलवे लाइट पॉइंट से आईटी पार्क तक जाने वाली सड़क पर 10 एकड़ जमीन फाइनल की थी।
हरियाणा ने इसके बदले चंडीगढ़ प्रशासन को पंचकूला जिले के सकेतड़ी में 12 एकड़ जमीन की पेशकश की थी। हालांकि, यूटी प्रशासन ने कई कारणों से इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था।
वहीं हरियाणा विधानसभा के मौजूदा स्पीकर हरविंदर कल्याण ने भी कहा था कि नए विधानसभा भवन की प्रक्रिया जारी है। उनका कहना था कि वर्तमान भवन में एक्सटेंशन का स्कोप नहीं है इसलिए नए विधानसभा भवन के लिए जमीन लेनी है।
उनका मानना था कि ऐसे में जमीन कैसे ली जाए, इसकी प्रक्रिया चल रही है। जमीन खरीदनी है या एक्सचेंज होगी, इसका फैसला बाकी है। सरकार विधानसभा भवन के लिए चंडीगढ़ की परिधि में जमीन देख रही है और चंडीगढ़ में ही नया विधानसभा भवन बनाया जाएगा।



