Yuva Haryana : हरियाणा में बुढ़ापा पेंशन का मुद्दा गरमाने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्टीकरण दिया हैं। उनके मुताबिक प्रदेश में किसी की पेंशन काटी नहीं गई है, नियमों के तहत सत्यापन के आधार पर कार्रवाई की गई है।
उनका कहना है कि विपक्ष भ्रम फैला रहा है कि प्रदेश में दो लाख लोगों की पेंशन काट दी गई है, जबकि किसी पेंशन लाभार्थी की मौत के बाद नियमानुसार उसकी पेंशन अपने आप बंद हो जाती है। दो लाख मामलों में से लगभग एक लाख तीन हजार लाभार्थियों की मौत के बाद पेंशन बंद हो गई है। पहले पोर्टल पर तकनीकी समस्या के चलते यह डाटा नहीं मिला था, जब नवंबर 2025 में मृत हुए लोगों का डाटा मिला तो उसके बाद एक साथ सभी मृतकों की पेंशन काट दी गई थी।
इनके अलावा 37 हजार लोगों की आयु 60 साल से कम थी और वे बुढ़ापा पेंशन का लाभ ले रहे थे। इन लोगों की भी पेंशन रोक दी गई है। डाटाबेस से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू की जा चुकी है।
करीब 39 हजार मामलों में स्थानीय समिति एवं सेक्टर समिति द्वारा आय आधारित पात्रता का सत्यापन नहीं किया गया है। इन लोगों की आय प्रमाणित होने के बाद पेंशन बहाल हो जाएगी।
बुढ़ापा पेंशन से जुड़ी शिकायतों के निवारण के लिए सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए है कि पेंशन से जुड़ी समस्याओं को सभी जिलों में एडीसी सप्ताह में दो बार सुने। सोमवार और वीरवार को इन मामलों का विवरण सुनिश्चित किया जाए।
सीएम ने ये बताया कि साल 2023 में आय सीमा दो लाख रुपए से बढ़ाकर तीन लाख रुपए किए जाने के बाद नए लाभार्थी बुढ़ापा पेंशन से जुड़े है। राज्य में अब 20 लाख 31 हजार लोग बुढ़ापा पेंशन का लाभ ले रहे है।
सीएम ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए ये भी कहा कि बुढ़ापा पेंशन पर आय की शर्त साल 1992 में 10 हजार रूपए सालाना पूर्व कांग्रेस सरकार में लगाई गई थी। उन्होंने ये भी कहा कि पूर्व इनेलो सरकार ने पांच वर्षों में 200 रुपए और कांग्रेस ने दस वर्षों में 700 रुपए की वृद्धि की थी जबकि भाजपा सरकार ने 11 वर्षों में 1000 रुपए से बढ़ाकर 3200 रुपए बुढ़ापा पेंशन की है, जो कि 2200 रुपए की वृद्धि है।



