Yuva Haryana: हरियाणा के पानीपत में उद्योगपतियों और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के बीच विवाद गहराता जा रहा है। प्रदूषण जांच (Pollution Checks) और ऑनलाइन मॉनिटरिंग के सख्त नियमों से परेशान उद्यमियों ने एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल करने और नेशनल हाईवे-44 (NH-44) के टोल प्लाजा पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उद्योगपतियों ने चेतावनी दी है कि यदि दशहरे तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन करेंगे।
इसके साथ ही उद्योगपतियों ने यह भी कहा कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वे पानीपत में अपनी इकाइयां (Units) बंद कर दिल्ली या उत्तर प्रदेश शिफ्ट होने को मजबूर होंगे।
600 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को मिला क्लोजर नोटिस
यह फैसला शुक्रवार को पानीपत डायर्स एसोसिएशन (Panipat Dyers’ Association) की एक महत्वपूर्ण बैठक में लिया गया, जिसमें विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
तकनीकी खामियों पर कार्रवाई: एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन मॉनिटरिंग में मामूली तकनीकी गड़बड़ियों के चलते उद्योगों को क्लोजर (बंदी) नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसके कारण उद्योगों का संचालन बेहद मुश्किल हो गया है।
जटिल प्रक्रिया: उद्योग बंद होने के बाद दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया बेहद जटिल और परेशानी भरी बना दी गई है।
600+ नोटिस: हरियाणा एनवायरनमेंट मैनेजमेंट सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष भीम राणा ने बताया कि CPCB (केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड), HSPCB (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) और थर्ड पार्टी एजेंसियों की सख्त जांच के चलते 600 से अधिक औद्योगिक इकाइयों को बंदी के नोटिस दिए जा चुके हैं।
बैग फिल्टर और गैस की कीमतों में विसंगति का मुद्दा
भीम राणा ने बताया कि उद्योगपतियों ने CPCB से मान्यता प्राप्त वेंडरों के पास बैग फिल्टर लगाने के लिए एडवांस पैसा जमा कराया था। इसके बावजूद कई वेंडर 1 अक्टूबर की समयसीमा तक काम पूरा करने में विफल रहे। वेंडरों की नाकामी की सजा उद्योगपतियों को भुगतनी पड़ रही है।
इसके अलावा, PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) और CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) की दरों में ₹46 से ₹71 प्रति किलोग्राम तक का भारी अंतर (Disparity) है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है।
NCR से बाहर निकालने या UP शिफ्ट करने की मांग
पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव विभु पालीवाल ने मांग की है कि:
- स्थाई नीति: उद्योग क्षेत्र के लिए कम से कम 5 साल की एक स्थाई नीति बनाई जाए।
- NCR से राहत: पानीपत को दिल्ली-एनसीआर (NCR) के दायरे से बाहर किया जाए।
- टेक्सटाइल पार्क: यदि एनसीआर से बाहर नहीं किया जा सकता, तो एनसीआर सीमा के बाहर एक टेक्सटाइल पार्क स्थापित किया जाए, हालांकि इससे उद्यमियों पर 3% अतिरिक्त माल भाड़ा (Freight Cost) पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने दिया न्योता
विभु पालीवाल के अनुसार, उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने उद्योगपतियों को राज्य में अपनी इकाइयां लगाने का न्योता दिया है। पानीपत के उद्यमी यूपी अधिकारियों के साथ 3 बैठकें भी कर चुके हैं और शामली व कैराना में अपने प्लांट शिफ्ट करने पर विचार कर रहे हैं।
इस बैठक में ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरभान सिंगला ने भी उद्योगों पर मंडरा रहे बंदी के संकट पर गहरी चिंता व्यक्त की।

