Yuva Haryana: हरियाणा और चंडीगढ़ के सरकारी विभागों के 657 करोड़ रुपये के कथित आईडीएफसी (IDFC) बैंक घोटाले में शुरुआती दिनों से ही लगातार गड़बड़ी के संकेत मिलते रहे, लेकिन जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों ने इन्हें गंभीरता से नहीं लिया। सीबीआई (CBI) की चार्जशीट के अनुसार, यदि कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दी गई चेतावनियों पर कार्रवाई की गई होती, तो इस घोटाले को समय रहते रोका जा सकता था।
जूनियर अधिकारियों की आवाज़ को दबाया गया
सीबीआई जांच में सामने आया है कि कई विभागों में तय सीमा से अधिक रकम जमा कराने, संदिग्ध लेन-देन, फर्जी बैंक स्टेटमेंट और नियमों की अनदेखी के मामले सामने आए थे। जब कनिष्ठ अधिकारियों ने बैंक खाते में जमा सीमा पार करने और फर्जी स्टेटमेंट पर सवाल उठाए, तो उच्च अधिकारियों ने उन्हें दबा दिया या उनका तबादला कर दिया।
प्रमुख विभागों में हुई अनदेखी और अनियमितताएं
पंचायत विभाग में सवाल उठाने पर मिली फटकार:
हरियाणा के विकास एवं पंचायत विभाग में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में खाते खोलकर रकम ट्रांसफर की गई। जब विधान के उपनिदेशक मनोज कौशल ने तय सीमा (50 करोड़ और 25 करोड़) से अधिक रकम भेजने पर सवाल उठाया, तो उन्हें फटकार लगाई गई।
पंचकुला निगम में आपत्तियां और अधिकारी का तबादला:
9 जनवरी 2026 को पंचकुला नगर निगम के लेखा निरीक्षक ने खाते में वास्तविक रकम और बैंक स्टेटमेंट में अंतर पकड़ा। इसके बाद जब सेक्शन ऑफिसर अनिल कुमार ने प्रतिस्पर्धी कोटेशन मांगने का सुझाव दिया, तो उन्हें पद से हटा दिया गया।
शिक्षा विभाग में 50 करोड़ की सीमा पार कर 100 करोड़ जमा किए:
शिक्षा विभाग में तत्कालीन आईएएस पंकज अग्रवाल के कार्यकाल के दौरान बैंक में 50 करोड़ रुपये की सीमा होने के बावजूद 100 करोड़ रुपये जमा करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। अधिकारियों द्वारा नियम याद दिलाने पर उन्हें “ज्यादा कानून न सिखाएं” कहकर चुप करा दिया गया।
10 करोड़ की धोखाधड़ी पर FIR के बजाय ‘सुलह‘ का भरोसा:
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड (HSAMB) में 10 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आने पर जब मुख्य एकाउंट्स ऑफिसर ने एफआईआर (FIR) दर्ज कराने का प्रस्ताव दिया, तो एफआईआर टालते हुए आरोपी बैंक अधिकारी से पैसे वापस दिलाने का आश्वासन दिया गया।
14% ब्याज के लालच में नियमों को किया दरकिनार:
हरियाणा पावर जनरेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPGCL) का खाता गैर-सूचीबद्ध होने के बावजूद आईडीएफसी बैंक में खोला गया। बैंक द्वारा एफडी (FD) तोड़कर नए खाते में 14% ब्याज का लालच दिया गया, जिसे उच्च अधिकारियों ने बिना किसी सवाल के स्वीकार कर लिया।
CBI की टिप्पणी:
सीबीआई का कहना है कि उच्च अधिकारियों द्वारा इतनी बड़ी ब्याज दर पर शक न करना और चेतावनी संकेतों को बार-बार नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

