Yuva Haryana: हरियाणा के नूंह जिले में स्थित मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की खराब हालत को लेकर छात्रों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से हस्तक्षेप करने की मांग की है। कॉलेज के छात्रावास की इमारत में दरारें, जर्जर दीवारें और लिंटेल से बाहर निकली लोहे की छड़ें विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं। छात्रों का कहना है कि कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ-साथ शैक्षणिक संसाधनों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।
करीब 150 छात्र ऐसे छात्रावास में रह रहे हैं, जिसकी दीवारों में दरारें हैं और कई जगह निर्माण सामग्री खराब हो चुकी है। छात्रों को आशंका है कि इमारत की मरम्मत समय पर नहीं हुई तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसी को लेकर उन्होंने राज्य सरकार से कॉलेज की इमारतों और छात्रावास की स्थिति सुधारने की मांग की है।
छात्रावास की जर्जर हालत से बढ़ी चिंता
छात्रावास की दीवारों पर दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ स्थानों पर लोहे की छड़ें बाहर निकली हुई हैं और इमारत की बाहरी सतह भी खराब हो चुकी है। छात्रों का कहना है कि इस स्थिति में छात्रावास में रहना जोखिम भरा हो सकता है।
विद्यार्थियों ने कॉलेज परिसर और छात्रावास की इमारतों की जांच कराने तथा जरूरी मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संस्थान और संबंधित अधिकारियों की प्राथमिकता होनी चाहिए।
कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप
छात्रों ने केवल इमारतों की खराब स्थिति ही नहीं, बल्कि कॉलेज में कई आवश्यक सुविधाओं की कमी का भी मुद्दा उठाया है। विद्यार्थियों ने पुस्तकालय, बेहतर प्रयोगशालाओं, इंटरनेट और वाई-फाई, सुरक्षित पेयजल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, सीसीटीवी कैमरों, चारदीवारी और चिकित्सा सुविधाओं की मांग की है।
छात्रों के अनुसार, इन सुविधाओं की कमी का असर पढ़ाई और रोजमर्रा के जीवन पर पड़ता है। इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम में आधुनिक प्रयोगशालाएं, पर्याप्त उपकरण और डिजिटल संसाधन महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में विद्यार्थियों का मानना है कि कॉलेज में बुनियादी ढांचे के साथ शैक्षणिक सुविधाओं को भी बेहतर बनाया जाना चाहिए।
वर्ष 2010 में शुरू हुआ था संस्थान
मेवात इंजीनियरिंग कॉलेज की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। इसका उद्देश्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना था। हालांकि, छात्रों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने संस्थान के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को लेकर चिंता जताई है।
नूंह जिले के एक स्थानीय प्रतिनिधि के हवाले से कहा गया है कि कॉलेज का लाभ केवल मेवात तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थी भी लाभान्वित होते हैं। ऐसे में संस्थान की स्थिति सुधारना क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
स्टाफ और पदोन्नति को लेकर भी सवाल
कॉलेज के स्टाफ से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों को लंबे समय से पदोन्नति नहीं मिली है। इसके अलावा, कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई गई है।
शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की स्थिति का असर संस्थान के शैक्षणिक माहौल पर पड़ सकता है। इसलिए छात्रों और संबंधित प्रतिनिधियों की मांग है कि कॉलेज की इमारतों की मरम्मत के साथ-साथ स्टाफ से जुड़े मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
छात्रों ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से कॉलेज की स्थिति का संज्ञान लेने और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में छात्रावास की सुरक्षा जांच, जर्जर इमारतों की मरम्मत, प्रयोगशालाओं और पुस्तकालय का सुधार तथा बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता शामिल है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार और संबंधित अधिकारी छात्रों की शिकायतों पर क्या कदम उठाते हैं। कॉलेज की इमारतों की तकनीकी जांच, जरूरी मरम्मत और सुविधाओं के विकास से विद्यार्थियों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
छात्रों की मांग है कि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द किया जाए, ताकि वे बिना किसी सुरक्षा चिंता के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।

