Yuva Haryana: हरियाणा में सर्दियों की शुरुआत से पहले वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्ती बढ़ाने की तैयारी की है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल हरियाणा के जिलों में स्टोन क्रशर इकाइयों से उड़ने वाली धूल और भारी वाहनों की आवाजाही से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए नई निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके तहत स्टोन क्रशर इकाइयों में वेब कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि इकाइयों से बाहर निकलने वाले वाहनों के पहियों की सफाई सुनिश्चित की जाएगी।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) का उद्देश्य प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नजर रखना और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई करना है। खासतौर पर महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी जैसे जिलों में संचालित स्टोन क्रशर इकाइयों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
स्टोन क्रशर इकाइयों में लगेंगे वेब कैमरे
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के अनुसार, स्टोन क्रशर इकाइयों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वीडियो निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके लिए पोर्टल तैयार किया जा रहा है, जिसके माध्यम से इकाइयों की गतिविधियों की ऑनलाइन निगरानी की जा सकेगी।
योजना के तहत 24 घंटे निगरानी की व्यवस्था करने का लक्ष्य है, ताकि प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की पहचान समय रहते की जा सके। कैमरों के जरिए वाहनों की आवाजाही, धूल नियंत्रण से जुड़े उपायों और अन्य निर्धारित व्यवस्थाओं पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
इससे अधिकारियों को मौके पर बार-बार निरीक्षण किए बिना भी इकाइयों की स्थिति का आकलन करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि, निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता कैमरों के सही संचालन और नियमित जांच पर निर्भर करेगी।
बाहर निकलने से पहले साफ करने होंगे वाहनों के पहिए
स्टोन क्रशर इकाइयों से निकलने वाले भारी वाहनों के पहियों पर मिट्टी और पत्थर की धूल जमा हो जाती है। जब ये वाहन मुख्य सड़कों पर पहुंचते हैं, तो उनके पहियों से धूल फैलती है, जिससे आसपास के वातावरण में प्रदूषण बढ़ सकता है।
इस समस्या को रोकने के लिए वाहनों के पहियों की सफाई की व्यवस्था अनिवार्य करने पर जोर दिया जा रहा है। इकाइयों में निर्धारित मानकों के अनुसार व्हील-वॉश सिस्टम और अन्य धूल नियंत्रण उपाय लागू करने होंगे।
इस व्यवस्था से सड़कों पर धूल जमा होने और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
महेंद्रगढ़, चरखी दादरी और भिवानी पर विशेष नजर
महेंद्रगढ़ जिले में खनन गतिविधियों के कारण बड़ी संख्या में स्टोन क्रशर इकाइयां संचालित होती हैं।जिले में लगभग 102 स्टोन क्रशर इकाइयां चल रही हैं। चरखी दादरी में भी करीब 300 तथा भिवानी में लगभग 52 स्टोन क्रशर इकाइयों का उल्लेख किया गया है।
इन इकाइयों से निकलने वाली धूल आसपास के गांवों, सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के फैलाव की परिस्थितियां बदलने से प्रदूषण की समस्या गंभीर हो सकती है।
इसी वजह से प्रदूषण नियंत्रण के उपायों को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उनके वास्तविक क्रियान्वयन पर ध्यान दिया जा रहा है।
उपकरण लगाना ही नहीं, चालू रखना भी जरूरी
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, स्टोन क्रशर इकाइयों में केवल उपकरण स्थापित कर देना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें नियमित रूप से चालू रखना और उनका रखरखाव करना भी जरूरी होगा।
इसमें धूल नियंत्रण प्रणाली, पानी का छिड़काव, पहियों की सफाई और वीडियो निगरानी जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाली इकाइयों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
सर्दियों से पहले प्रदूषण रोकने की तैयारी
सर्दियों के दौरान NCR में वायु प्रदूषण अक्सर चिंता का विषय बन जाता है। औद्योगिक गतिविधियों, निर्माण कार्य, सड़क की धूल और वाहनों से होने वाला उत्सर्जन हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे में स्टोन क्रशर इकाइयों की निगरानी बढ़ाने से प्रदूषण के एक महत्वपूर्ण स्रोत पर नियंत्रण पाने में मदद मिल सकती है।
नई व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कैमरे कितनी नियमितता से काम करते हैं, वाहनों की सफाई के नियमों का कितना पालन होता है और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई की जाती है।

