Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने सरकारी कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और उनके आश्रितों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इम्पैनलमेंट पॉलिसी-2026 लागू कर दी है। नई नीति में वर्ष 2023 की पॉलिसी की तुलना में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिससे विशेष रूप से छोटे अस्पतालों को राहत मिलेगी।
नई पॉलिसी के तहत आयुष्मान भारत पंजीकरण, आयकर छूट प्रमाण पत्र और पारदर्शिता से जुड़े नियमों में संशोधन किया गया है। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पोर्टल और रियल-टाइम अपडेट प्रणाली से जोड़कर अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
आयुष्मान भारत पंजीकरण में राहत
पहले छोटे स्वास्थ्य संस्थानों, आई केयर सेंटर, डेंटल एवं मेडिकल इमेजिंग सेंटर तथा स्टैंड-अलोन लैब के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकरण अनिवार्य था। अब क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट-2010 के दायरे से बाहर आने वाले अस्पतालों के लिए यह अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। ऐसे संस्थानों का विभाग द्वारा प्री-इंस्पेक्शन किया जाएगा।
आयकर छूट प्रमाण पत्र जमा करने के लिए 3 साल की मोहलत
नई नीति में डेंटल, इमेजिंग और लैब संस्थानों को छोड़कर अन्य सभी अस्पतालों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 17 के तहत टैक्स छूट प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य किया गया है। हालांकि अस्पतालों को यह दस्तावेज जमा करने के लिए तीन वर्ष की अतिरिक्त मोहलत दी गई है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्रमाण पत्र न देने पर अस्पताल स्वतः सूची से बाहर हो जाएंगे।
पारदर्शिता और रियल-टाइम अपडेट पर जोर
सरकार ने पॉलिसी में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए यह व्यवस्था की है कि यदि कोई अस्पताल किसी कारणवश अयोग्य घोषित होता है तो अलग से नोटिस जारी करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर रियल-टाइम अपडेट किया जाएगा। वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी को अंतिम और वैध माना जाएगा।
1,340 पैकेज रेट लागू रहेंगे
सरकार द्वारा इम्पैनल किए गए निजी अस्पताल निर्धारित 1,340 फिक्स पैकेज रेट के अनुसार ही शुल्क वसूल सकेंगे। अस्पतालों को इम्प्लांट्स या नॉन-पैकेज सेवाओं के लिए भी निर्धारित नियमों के तहत ही शुल्क लेने की अनुमति होगी।
नई इम्पैनलमेंट पॉलिसी-2026 से छोटे अस्पतालों को राहत मिलने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

