Yuva Haryana: हरियाणा के कुरुक्षेत्र के सेक्टर-30 निवासी जितेंद्र कुमार ने बैंक की नौकरी छोड़कर कृषि ड्रोन के क्षेत्र में अपना स्टार्टअप शुरू किया। विदेश में कृषि से जुड़े लेख पढ़ने के बाद उन्हें कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल का विचार आया। आज उनका कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है और उनके साथ 100 से अधिक युवा जुड़े हुए हैं।
जितेंद्र युवाओं को निःशुल्क ड्रोन प्रशिक्षण भी दे रहे हैं। उनके बनाए ड्रोन का इस्तेमाल खेतों में कीटनाशक और कृषि रसायनों के छिड़काव के लिए किया जा रहा है।
150 लीटर पानी का काम 10 लीटर में
जितेंद्र के अनुसार, पारंपरिक तरीके से एक एकड़ खेत में कीटनाशक के छिड़काव के लिए करीब 150 लीटर पानी और लगभग डेढ़ घंटे का समय लगता था। ड्रोन तकनीक से यही काम करीब 10 लीटर पानी में 7 मिनट में किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक को अपनाने की दिशा में काम करने का विचार उन्हें विदेशों में कृषि से संबंधित लेख पढ़ने के बाद आया।
नौकरी छोड़ 2024 में शुरू किया स्टार्टअप
जितेंद्र की नौकरी बैंक में लगी थी, लेकिन उनका रुझान कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की ओर था। इसी सोच के चलते उन्होंने नौकरी छोड़कर 2024 में ड्रोन आधारित कृषि स्टार्टअप शुरू किया।
उन्होंने चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से बीटेक (एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग) किया है। शुरुआत में उन्होंने करीब 1 लाख रुपये से ड्रोन तैयार करने का काम शुरू किया। शुरुआती दौर में एक ड्रोन करीब 200 रुपये की पहली कमाई से तैयार करने की बात उन्होंने बताई।
अब उनका कारोबार सालाना करीब 3 करोड़ रुपये के टर्नओवर तक पहुंच गया है। सरकार की ओर से उन्हें करीब 3.50 लाख रुपये की सब्सिडी भी दी जाती है।
किसानों के लिए ड्रोन से छिड़काव और निगरानी
जितेंद्र ने बताया कि साल 2021 से वे कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों के छिड़काव और फसलों की निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका मानना है कि ड्रोन तकनीक से खेती के कई काम आसान और कम समय में किए जा सकते हैं।
उनके स्टार्टअप से अब 100 से अधिक युवा जुड़े हुए हैं। साथ ही युवाओं को ड्रोन संचालन की ट्रेनिंग देकर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार से मिला 1 करोड़ रुपये का अनुदान
जितेंद्र के मुताबिक, उनके प्रोजेक्ट की क्षमता को देखते हुए सरकार की ओर से 1 करोड़ रुपये का अनुदान और 25 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। सरकारी प्रोत्साहन का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपनी कंपनी के क्षेत्र में नए प्रयोग और विस्तार पर काम किया।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में एक और प्रयोग करते हुए करीब 12 लाख रुपये की कीमत वाले कृषि ड्रोन को लगभग 7 लाख रुपये में तैयार करके दिखाया। इस ड्रोन को किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
50% तक मिल सकता है अनुदान
कृषि ड्रोन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक अनुदान दिए जाने की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। अनुदान मिलने के बाद किसानों के लिए आधुनिक कृषि ड्रोन करीब 3.5 लाख रुपये में उपलब्ध होने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
जितेंद्र का कहना है कि तकनीक को किसानों तक पहुंचाने और युवाओं को इससे जोड़ने से कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है।

