Yuva Haryana : हरियाणा के पूर्व सांसद और भाजपा नेता कुलदीप बिश्नोई इन दिनों अपने पारंपरिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। खास बात यह है कि इन कार्यक्रमों में भाजपा के झंडे, बैनर या अन्य पार्टी चिन्ह नजर नहीं आ रहे हैं। हिसार, सिरसा, जींद, कैथल और चरखी दादरी में हो रहे इन कार्यक्रमों को लेकर उनकी आगे की राजनीतिक रणनीति को लेकर चर्चा तेज हुई है।
कुलदीप बिश्नोई समर्थकों के साथ सार्वजनिक संपर्क कार्यक्रमों के अलावा बंद कमरे में बैठकें भी कर रहे हैं। यह गतिविधियां ऐसे समय में हो रही हैं, जब बिश्नोई परिवार को 2024 में आदमपुर विधानसभा सीट पर राजनीतिक झटका लगा था। उनके बेटे भव्य बिश्नोई को कांग्रेस के चंद्र प्रकाश ने हराया था। इसके अलावा कुलदीप बिश्नोई को हिसार लोकसभा चुनाव में भाजपा का टिकट नहीं मिला और राज्यसभा नामांकन की उनकी कथित उम्मीद भी पूरी नहीं हुई।
भाजपा के साथ बने रहने का दावा
कुलदीप बिश्नोई ने सार्वजनिक रूप से भाजपा के साथ रहने की बात कही है। जून 2026 में सिरसा के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि पार्टी के भीतर मतभेद खत्म हो चुके हैं और वह तथा उनके समर्थक भाजपा के साथ हैं। उसी दौरान उन्होंने बड़े स्तर पर जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित करने की बात भी कही थी।
इसके बावजूद मौजूदा कार्यक्रमों में पार्टी के संगठनात्मक प्रतीकों की अनुपस्थिति ने उनकी राजनीतिक गतिविधियों को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है।
राजनीतिक सफर में कई बदलाव
कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक सफर कई राजनीतिक गठबंधनों और दलों के बदलाव से जुड़ा रहा है। उन्होंने 2007 में कांग्रेस से अलग होकर हरियाणा जनहित कांग्रेस बनाई। बाद में पार्टी का बसपा और भाजपा के साथ गठबंधन हुआ। 2016 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का कांग्रेस में विलय हुआ। इसके बाद बिश्नोई ने 2022 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा।
उनके करीबी सहयोगी अजय प्रताप सिंह उर्फ बबलू खटाना के जननायक जनता पार्टी में शामिल होने को भी उनके खेमे के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
भाजपा नेतृत्व के साथ पहले भी सामने आए मतभेद
हाल के महीनों में बिश्नोई और भाजपा नेतृत्व के बीच उनके पिता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल से संबंधित टिप्पणियों को लेकर सार्वजनिक विवाद भी सामने आया था। बाद में बिश्नोई ने कहा था कि विवाद खत्म हो चुका है और भाजपा के साथ उनके मतभेद दूर हो गए हैं।
फिलहाल बिश्नोई की ओर से भाजपा से अलग होने की कोई घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में पार्टी के बैनर और प्रतीकों के बिना लगातार जनसंपर्क कार्यक्रम चलाने को उनकी राजनीतिक गतिविधियों के एक नए चरण के रूप में देखा जा रहा है। उनकी आगे की रणनीति को लेकर अंतिम तस्वीर अभी स्पष्ट नहीं है।

