Yuva Haryana: हरियाणा में कचरे के बेहतर प्रबंधन और उससे बिजली बनाने की योजना पर काम तेज हो गया है। हिसार के धांडूर गांव के पास प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट के लिए जमीन का निरीक्षण किया गया है। ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (OGEL) की दिल्ली से आई तीन सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने मौके पर पहुंचकर परियोजना के लिए प्रस्तावित जमीन का जायजा लिया। नगर निगम की तकनीकी टीम भी इस दौरान मौजूद रही। अब जमीन की मिट्टी की जांच कराई जाएगी, जिसके नतीजों के आधार पर आगे की तकनीकी प्रक्रिया तय होगी।
ढंढूर गांव के पास प्रस्तावित है प्लांट
इस परियोजना का उद्देश्य शहरों से निकलने वाले ठोस कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना और उससे उपयोगी ऊर्जा तैयार करना है। निरीक्षण के दौरान नगर निगम की टीम ने विशेषज्ञों को प्रस्तावित स्थल से संबंधित जानकारी दी। नगर निगम आयुक्त सी. जयश्रद्धा के मार्गदर्शन में एक्सईएन जयवीर दूडी सहित तकनीकी अधिकारियों की टीम परियोजना से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रख रही है।
मिट्टी की जांच इस परियोजना का अहम चरण है। इससे जमीन की स्थिति और निर्माण से जुड़ी तकनीकी जरूरतों का आकलन करने में मदद मिलेगी। जांच के परिणामों के बाद प्लांट के निर्माण और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
55 एकड़ जमीन में से 15 एकड़ परियोजना के लिए
प्लांट के लिए सरकारी पशुधन फार्म की जमीन को चिह्नित किया गया है। इस क्षेत्र में कुल 55 एकड़ जमीन है, जिसमें से 15 एकड़ जमीन परियोजना के लिए लीज पर दी गई है। इस स्थान पर ठोस कचरे के प्रसंस्करण और उससे ऊर्जा उत्पादन की व्यवस्था विकसित करने की योजना है।
परियोजना से हिसार के साथ आसपास के कई शहरी क्षेत्रों में कचरे के निस्तारण की समस्या कम करने की उम्मीद है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत हिसार, हांसी, फतेहाबाद, जींद और भिवानी जिले के सिवानी क्षेत्र से आने वाले कचरे को भी परियोजना से जोड़ा जाना है।
5 से 10 मेगावाट बिजली बनाने का लक्ष्य
हिसार के प्रस्तावित प्लांट से लगभग 5 से 10 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, हरियाणा सरकार की अगस्त 2026 की विज्ञप्ति में हिसार क्लस्टर के लिए प्रतिदिन 500 टन कचरे के प्रसंस्करण और कम से कम 5 मेगावाट बिजली उत्पादन का अनुमान बताया गया है।
इस योजना का मकसद कचरे को केवल डंप करने के बजाय उसका उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करना है। इससे कचरे के ढेर कम करने, पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव को घटाने और स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन क्षमता और प्लांट के शुरू होने की स्थिति आगे की तकनीकी प्रक्रिया तथा निर्माण कार्य पर निर्भर करेगी।
बिजली ग्रिड से जोड़ने की भी तैयारी
प्लांट से बनने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए बिजली विभाग की ओर से भी तैयारी की जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, चिकनवास में 220 केवी सबस्टेशन तैयार है। प्रस्तावित प्लांट को इस सबस्टेशन से जोड़ने के लिए करीब 10 किलोमीटर लंबी 33 केवी लाइन की योजना बनाई गई है।
इसके अलावा, कचरा प्रसंस्करण से जुड़े कार्य के लिए 9.93 करोड़ रुपये का टेंडर मेरठ की एक एजेंसी को दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए जमीन, कचरा प्रबंधन और बिजली कनेक्शन जैसी व्यवस्थाओं का समन्वय जरूरी होगा।
हरियाणा में चार वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं की योजना
यह परियोजना राज्य में कचरे से ऊर्जा तैयार करने की व्यापक योजना का हिस्सा है। हरियाणा सरकार ने हिसार, अंबाला, फरीदाबाद और गुरुग्राम क्लस्टर में चार एकीकृत वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजनाओं के लिए समझौता ज्ञापनों की जानकारी दी थी। इन सभी परियोजनाओं के माध्यम से कुल मिलाकर प्रतिदिन 5,000 टन नगरपालिका ठोस कचरे के प्रसंस्करण और लगभग 50 मेगावाट हरित बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की विज्ञप्ति के अनुसार, इन परियोजनाओं के अक्टूबर 2028 तक चालू होने की अपेक्षा है।
हिसार में फिलहाल जमीन के निरीक्षण और मिट्टी की जांच की तैयारी जैसे चरणों पर काम हो रहा है। आगे निर्माण, बिजली कनेक्शन और कचरे की नियमित आपूर्ति से जुड़ी व्यवस्थाएं परियोजना की प्रगति तय करेंगी। यदि योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है, तो इससे हिसार और आसपास के क्षेत्रों में ठोस कचरे के प्रबंधन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था विकसित हो सकती है।

