Yuva Haryana: पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (UHSR), रोहतक के अंतर्गत आने वाले PGIMS अस्पताल से एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में भर्ती होने वाले करीब 40% मरीजों के पास आयुष्मान भारत (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) का पहचान पत्र मौजूद है, लेकिन इनमें से केवल 6% मरीज ही इस योजना के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ उठा पा रहे हैं।
स्टाफ की कमी और खरीद में देरी मुख्य वजह
विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, आयुष्मान योजना के इस सुस्त कार्यान्वयन के पीछे कई प्रमुख ढांचागत और प्रशासनिक कारण जिम्मेदार हैं:
कर्मचारियों की कमी: अस्पताल में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण पंजीकरण प्रक्रिया में लंबा समय लगता है, जिससे मौजूदा स्टाफ पर अत्यधिक कार्यभार बढ़ जाता है।
दवाइयों और सर्जिकल सामान की अनुपलब्धता: अस्पताल में जरूरी दवाओं और सर्जिकल उपकरणों की आपूर्ति में देरी होती है।
जटिल प्रक्रिया: खरीद प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण मरीज योजना का तुरंत लाभ उठाने से वंचित रह जाते हैं।
मुख्यमंत्री के संज्ञान के बाद एक्शन मोड में प्रशासन
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने PGIMS जैसे राज्य के प्रमुख टर्शरी-केयर अस्पताल में योजना के कम नामांकन और धीमे कार्यान्वयन पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि पात्र लाभार्थियों का नामांकन और इलाज का दायरा तुरंत बढ़ाया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए UHSR प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों और रेजिडेंट डॉक्टरों को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी है कि हर पात्र मरीज को योजना के तहत पंजीकृत किया जाए।
15 हाउस सर्जन तैनात, समर्पित आयुष्मान सेल गठित
प्रशासनिक स्तर पर आई बाधाओं को दूर करने और योजना को सुचारू बनाने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
विशेष आयुष्मान सेल का गठन: काम में तेजी लाने के लिए एक अलग ‘आयुष्मान सेल’ स्थापित किया गया है।
15 डॉक्टरों की तैनाती: विभिन्न विभागों से 15 हाउस सर्जनों को विशेष रूप से आयुष्मान योजना के कार्यों को तेजी से निपटाने के लिए लगाया गया है।
केवल दो विभागों में 100% लक्ष्य हासिल
रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में केवल कार्डियोलॉजी (हृदय रोग) और ऑर्थोपेडिक्स (हड्डी रोग) विभाग ही ऐसे हैं जहाँ 100% पात्र मरीजों को योजना का लाभ मिल रहा है। इसके अलावा मेडिसिन यूनिट-III में 95 से 100% के बीच रूपांतरण दर (conversion rate) दर्ज की गई है।
रोजाना 8,000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं PGIMS
अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, हरियाणा और पड़ोसी राज्यों के विभिन्न जिलों से प्रतिदिन 8,000 से अधिक मरीज PGIMS के OPD और ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए आते हैं। इनमें से एक बड़ी संख्या आयुष्मान भारत योजना के पात्र लाभार्थियों की होती है, जिन्हें सर्जरी, विशेषज्ञ प्रक्रियाओं और अन्य आवश्यक इलाज की सख्त आवश्यकता होती है। प्रशासन का दावा है कि जल्द ही सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर अधिक से अधिक मरीजों तक इस योजना का लाभ पहुंचाया जाएगा।

