कई जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश, तापमान में गिरावट से बढ़ी ठंड की आहट; 9 जिलों में AQI 100 से नीचे
Yuva Haryana: हरियाणा में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश तथा ओलावृष्टि के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। रात के तापमान में कमी आने से लोगों को पहली बार मौसम में सर्दी का अहसास होने लगा है। वहीं, तेज हवाओं और बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई इलाकों में खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने की खबर है, जिससे कटाई और फसल को सुरक्षित रखने में परेशानी हो सकती है।
प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में रात का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया। कैथल, कुरुक्षेत्र और आसपास के इलाकों में मौसम का असर दिखाई दिया। दूसरी ओर, बारिश के बाद हवा में प्रदूषण का स्तर भी कई जिलों में कम हुआ है।
बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल प्रभावित
प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने से खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई। कैथल में बारिश और तेज हवा के कारण बासमती धान की फसल खेतों में बिछ गई। इससे किसानों को फसल की कटाई, सुखाने और मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी हो सकती है।
धान की फसल पकने के समय बारिश होने से दानों की गुणवत्ता प्रभावित होने और खेतों में नमी बढ़ने का खतरा रहता है। यदि फसल लंबे समय तक गिरी रहती है, तो कटाई में अधिक समय लग सकता है। मंडियों में पहुंचने वाली उपज को भी बारिश से बचाना जरूरी हो जाता है।
हरियाणा में इस समय धान की खरीद और कटाई का काम महत्वपूर्ण चरण में है। ऐसे में किसानों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम की स्थिति पर नजर रखें और कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने से बचें। मंडियों में भी धान को तिरपाल से ढकने तथा पानी की निकासी की व्यवस्था करने की जरूरत है।
हाल ही में प्रदेश में हुई बारिश और ओलावृष्टि से कुछ क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की खबरें भी सामने आई हैं।
रात का तापमान गिरने से बढ़ी ठंड की आहट
मौसम में बदलाव के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान नीचे आया है। हिसार जिले के बालसमंद में न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज है, जो सामान्य से करीब 2.3 डिग्री कम बताया गया है।
रात के तापमान में गिरावट के कारण सुबह और देर शाम हल्की ठंड महसूस होने लगी है। पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों के मौसम पर भी पड़ सकता है। हालांकि, तापमान में आगे कितनी गिरावट आएगी, यह आने वाले दिनों में पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधि और हवा की दिशा पर निर्भर करेगा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 26 अक्टूबर के पूर्वानुमान के अनुसार, हरियाणा में 26 से 28 अक्टूबर के दौरान कोई मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई थी। विभाग ने 29 और 30 अक्टूबर के लिए गरज-चमक तथा तेज हवाओं से जुड़ी संभावित गतिविधियों का संकेत दिया है।
नौ जिलों में AQI 100 से नीचे
बारिश और तेज हवाओं का असर वायु गुणवत्ता पर भी देखने को मिला। हरियाणा के नौ जिलों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 100 से नीचे रहा। यह अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता का संकेत है।
AQI का स्तर हवा में मौजूद प्रदूषक कणों और अन्य प्रदूषकों के आधार पर तय किया जाता है। बारिश हवा में मौजूद कुछ कणों को नीचे बैठाने में मदद कर सकती है, जबकि तेज हवाएं प्रदूषकों को फैलाने में सहायक होती हैं। हालांकि, वायु गुणवत्ता में सुधार स्थायी नहीं होता और मौसम बदलने पर प्रदूषण दोबारा बढ़ सकता है।
इसलिए लोगों को केवल एक दिन के AQI के आधार पर हवा की गुणवत्ता का आकलन नहीं करना चाहिए। स्थानीय स्तर पर जारी दैनिक आंकड़ों पर नजर रखना जरूरी है।
हिमाचल में बर्फबारी से पर्यटन स्थलों पर बढ़ी हलचल
हरियाणा के मौसम में बदलाव के साथ हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी की खबरों ने भी लोगों का ध्यान खींचा है। मनाली और आसपास के ऊंचे इलाकों में बर्फबारी के बाद पर्यटकों की आवाजाही बढ़ी है। रोहतांग, बारालाचा और अन्य ऊंचे क्षेत्रों में ठंड का असर अधिक महसूस किया जा रहा है।
बर्फबारी से पर्यटन कारोबार को फायदा मिल सकता है, लेकिन ऊंचाई वाले मार्गों पर यात्रा करने वालों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलना चाहिए।
किसानों और आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए ?
मौसम में बदलाव को देखते हुए किसानों को कटी हुई धान की फसल सुरक्षित रखने, मंडियों में उपज ढकने और खेतों में जलभराव से बचाव की व्यवस्था करने पर ध्यान देना चाहिए। तेज हवा या गरज-चमक के दौरान खुले खेतों में काम करने से बचना भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, हरियाणा में बारिश और ओलावृष्टि से तापमान में गिरावट आई है, लेकिन इससे धान की फसल को नुकसान की चिंता भी बढ़ी है। आने वाले दिनों में मौसम की स्थिति और तापमान में होने वाले बदलाव पर किसानों तथा आम लोगों की नजर रहेगी।

