Yuva Haryana : हरियाणा की 26 वर्षीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने एशियन गेम्स 2026 में महिला ट्रैप की व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। 28 अंक के साथ उन्होंने नया एशियन गेम्स रिकॉर्ड बनाया और इस स्पर्धा में भारत की पहली महिला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक विजेता बनीं।
लेकिन नीरू की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे एक लंबा संघर्ष और बदलाव की कहानी है। वह शुरुआत में कबड्डी खेलती थीं, लेकिन अपने चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण की उपलब्धि से प्रेरित होकर उन्होंने शूटिंग को अपना करियर बनाने का फैसला किया।
लक्ष्य श्योराण से मिली प्रेरणा
नीरू के शूटिंग करियर की शुरुआत 2018 एशियन गेम्स के बाद हुई। उनके चचेरे भाई लक्ष्य श्योराण ने जकार्ता एशियन गेम्स में पुरुष ट्रैप स्पर्धा का रजत पदक जीता था। परिवार और गांव में उनके स्वागत के बाद नीरू ने भी शूटिंग में आगे बढ़ने की इच्छा जताई।
उस समय नीरू कबड्डी खेलती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शूटिंग को गंभीरता से अपनाने का फैसला किया। शुरुआत में उन्होंने अपने भाई से प्रशिक्षण लिया और बाद में मध्य प्रदेश की शूटिंग अकादमी में चयन हासिल किया।


हरियाणा की जड़ों से राष्ट्रीय स्तर तक
नीरू का परिवार हरियाणा के जींद जिले से जुड़ा है और बाद में परिवार मध्य प्रदेश के शिवपुरी चला गया था। आज वह भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार हैं और सेना की आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट, महू में प्रशिक्षण लेती हैं।
उनकी मेहनत का नतीजा 2022 के नेशनल गेम्स में भी देखने को मिला, जहां उन्होंने महिला ट्रैप में स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया।
2025 में एशियन चैंपियनशिप गोल्ड
नीरू ने 2025 में एशियन शूटिंग चैंपियनशिप में महिला ट्रैप का स्वर्ण पदक जीतकर अपनी पहचान मजबूत की। इसके बाद वह भारतीय शूटिंग टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हो गईं।
2026 में वर्ल्ड कप में भी रचा इतिहास
नीरू के लिए 2026 बेहद खास साल रहा। इटली के लोनाटो में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में उन्होंने महिला ट्रैप का स्वर्ण पदक जीता। वह ISSF वर्ल्ड कप में महिला ट्रैप का व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। क्वालीफिकेशन में उन्होंने 125 में से 121 अंक बनाकर राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी कायम किया।
एशियन गेम्स में पहले सिल्वर, फिर गोल्ड
एशियन गेम्स 2026 में भी नीरू ने शानदार शुरुआत की। महिला ट्रैप टीम स्पर्धा में नीरू, आशिमा अहलावत और मनीषा कीर की भारतीय टीम ने रजत पदक जीता। नीरू ने टीम स्पर्धा में 125 में से 118 अंक बनाए।
इसके बाद व्यक्तिगत स्पर्धा के क्वालीफिकेशन में नीरू ने 118 अंक बनाए और फाइनल में जगह बनाई। फाइनल में उन्होंने 28 अंक हासिल किए और चीन की सुन यूनोंग को पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। उनका 28 का स्कोर पिछला 24 का एशियाई रिकॉर्ड तोड़ने में सफल रहा।
कबड्डी खेलने वाली लड़की से एशियन गेम्स चैंपियन तक
नीरू ढांडा की कहानी सिर्फ एक पदक की कहानी नहीं है। यह उस खिलाड़ी की यात्रा है जिसने एक खेल से दूसरे खेल की ओर कदम बढ़ाया, सीमित संसाधनों के बावजूद अपने लक्ष्य पर काम किया और कुछ ही वर्षों में राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
2018 में अपने चचेरे भाई की एशियन गेम्स सफलता से प्रेरित होकर शूटिंग चुनने वाली नीरू ने आठ साल बाद उसी मंच पर भारत के लिए इतिहास रच दिया।

