हरियाणा में 2 हजार निजी बसों के पहिए थमने का खतरा, किराया नहीं बढ़ा तो परमिट सरेंडर करेंगे ऑपरेटर
Yuva Haryana: हरियाणा में निजी बस संचालकों और परिवहन विभाग के बीच किराया बढ़ाने को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। निजी बस ऑपरेटरों ने सरकार से यात्री किराया बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2020 के बाद से बस किराये में कोई संशोधन नहीं हुआ, जबकि डीजल, टायर, स्पेयर पार्ट्स, बीमा, रखरखाव और कर्मचारियों के वेतन का खर्च लगातार बढ़ा है। यदि सरकार ने जल्द उनकी मांग पर फैसला नहीं लिया, तो ऑपरेटर परमिट सरेंडर करने का कदम उठा सकते हैं। इससे प्रदेश में करीब 2 हजार निजी बसों का संचालन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
छह साल से किराया नहीं बढ़ने का दावा
निजी बस संचालकों का कहना है कि मौजूदा किराया व्यवस्था में बस चलाना लगातार मुश्किल होता जा रहा है। उनका दावा है कि वर्ष 2020 के बाद यात्री किराये में बदलाव नहीं किया गया, जबकि इस अवधि में संचालन की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई है।
हरियाणा के निजी बस ऑपरेटरों ने किराया बढ़ाने की मांग उठाई । प्रदेश में करीब 1,750 निजी बसें चल रही थीं और संचालकों ने बढ़ती लागत के कारण मौजूदा किराया व्यवस्था को आर्थिक रूप से मुश्किल बताया था।
1 रुपये से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग
स्टेज कैरिज ट्रांसपोर्ट सोसायटी एंड प्राइवेट बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से यात्री किराया बढ़ाने की मांग की है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. धन सिंह के मुताबिक, मौजूदा किराया बढ़ती लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है।
ऑपरेटर चाहते हैं कि किराया बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलोमीटर किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने किराये में नियमित संशोधन की व्यवस्था बनाने की मांग भी उठाई है, ताकि डीजल की कीमतों और महंगाई में बदलाव के अनुसार किराया तय किया जा सके।
उनका कहना है कि यदि किराया तय करने के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था बनती है, तो हर बार बढ़ती लागत के कारण सरकार के सामने अलग से मांग रखने की जरूरत कम हो सकती है।
डीजल से लेकर टायर और बीमा तक बढ़ा खर्च
निजी बस संचालकों के अनुसार, बस चलाने में सबसे बड़ा खर्च डीजल का होता है। इसके अलावा टायर, बैटरी, इंजन और अन्य स्पेयर पार्ट्स की कीमतें भी बढ़ी हैं। बसों के बीमा, मरम्मत और नियमित रखरखाव पर भी पहले से अधिक खर्च करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के वेतन और अन्य परिचालन खर्च में वृद्धि ने भी ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ाया है। ऐसे में उनका कहना है कि पुराने किराये पर बसें चलाने से कई मार्गों पर संचालन आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।
यदि बसों का संचालन घाटे में रहता है, तो कुछ ऑपरेटर सेवाएं बंद करने या परमिट सरेंडर करने पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, परमिट सरेंडर करने का फैसला और वास्तविक रूप से बस सेवाएं बंद होना अलग-अलग बातें हैं।
मुफ्त और रियायती यात्रा के भुगतान का मुद्दा
ऑपरेटरों ने मुफ्त और रियायती यात्रा से जुड़े भुगतान तथा किराये में नियमित संशोधन का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि सरकारी नियमों के तहत पात्र यात्रियों को सुविधा देना जरूरी है, लेकिन बढ़ती परिचालन लागत के बीच आर्थिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
हरियाणा परिवहन विभाग ने निजी स्टेज कैरिज बस संचालकों को पात्र यात्रियों के लिए मुफ्त और रियायती यात्रा संबंधी नियमों का पालन करने के निर्देश दिए थे। विभाग ने स्पष्ट किया था कि परमिट की शर्तों के तहत इन सुविधाओं का पालन करना जरूरी है।
सरकार के फैसले पर टिकी नजरें
निजी बस संचालकों की मांग पर सरकार की ओर से किराया बढ़ाने का अंतिम फैसला सामने आना बाकी है। यदि मांग पर सहमति नहीं बनती और बड़ी संख्या में ऑपरेटर परमिट सरेंडर करते हैं, तो ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
निजी बसें कई मार्गों पर यात्रियों को गांवों, कस्बों और शहरों के बीच आने-जाने की सुविधा देती हैं। ऐसे में बसों की संख्या घटने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है।
फिलहाल यह मामला निजी बस संचालकों की मांग और सरकार के संभावित फैसले से जुड़ा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार किराया बढ़ाने, नियमित समीक्षा की व्यवस्था बनाने और ऑपरेटरों की अन्य मांगों पर क्या कदम उठाती है।

