हरियाणा में डॉग बाइट केस की रिपोर्टिंग होगी अनिवार्य, अस्पतालों पर सख्ती की तैयारी; ₹5,000 जुर्माना और जेल का भी प्रावधान
Yuva Haryana: हरियाणा में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर निगरानी मजबूत करने के लिए राज्य सरकार डॉग बाइट के मामलों की रिपोर्टिंग अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है। अस्पतालों को कुत्ते के काटने से जुड़े हर मामले की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के पोर्टल पर दर्ज करनी पड़ सकती है। प्रस्तावित व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों का सही रिकॉर्ड तैयार करना, प्रभावित लोगों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना और रेबीज जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को कम करना है।
रिपोर्ट में नियमों का पालन नहीं करने पर 5,000 रुपये तक जुर्माने और छह महीने तक की जेल का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन दंडात्मक प्रावधानों की अंतिम स्थिति और लागू होने की तारीख की आधिकारिक अधिसूचना से पुष्टि जरूरी है।
हर डॉग बाइट केस का रिकॉर्ड रखने की तैयारी
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत अस्पतालों को कुत्ते के काटने के प्रत्येक मामले की जानकारी नियमित रूप से दर्ज करनी होगी। इसमें मरीज से जुड़ी जरूरी जानकारी, घटना और उपचार का विवरण शामिल हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के पोर्टल पर दर्ज करने की व्यवस्था बनाने की तैयारी है।
इससे स्वास्थ्य विभाग को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किस जिले और क्षेत्र में कुत्तों के काटने की घटनाएं अधिक हो रही हैं। आंकड़ों के आधार पर प्रभावित इलाकों में टीकाकरण, जागरूकता और आवारा कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े कदमों की योजना बनाई जा सकती है।
रिकॉर्ड नहीं होने से निगरानी में आती है परेशानी
डॉग बाइट के मामलों का सही रिकॉर्ड नहीं होने से बीमारी के प्रसार और उपचार की जरूरतों का आकलन करना मुश्किल हो सकता है। यदि अस्पतालों में जानकारी व्यवस्थित तरीके से दर्ज की जाती है, तो स्वास्थ्य विभाग को यह समझने में सहायता मिलेगी कि किन क्षेत्रों में अधिक मामले सामने आ रहे हैं और वहां किन सुविधाओं की जरूरत है।
हरियाणा में कुत्तों के काटने की घटनाओं का आंकड़ा पहले भी चिंता का विषय रहा है। जनवरी 2020 से अगस्त 2025 के बीच राज्य के सात जिलों में 4.86 लाख से अधिक डॉग बाइट मामले दर्ज किए गए थे। इनमें बच्चे भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए थे।
अस्पतालों की जवाबदेही बढ़ाने पर जोर
रिपोर्ट में प्रस्तावित व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य अस्पतालों की जवाबदेही तय करना है। यदि हर मामले की जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होता है, तो स्वास्थ्य विभाग के पास उपचार और घटनाओं से जुड़ा अधिक व्यवस्थित डेटा उपलब्ध हो सकेगा।
कुत्ते के काटने के बाद समय पर उपचार बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य अधिकारियों को मामलों की जानकारी मिलने से प्रभावित क्षेत्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता का आकलन करने में भी मदद मिल सकती है।
केंद्र सरकार का राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम भी पशुओं के काटने से जुड़े मामलों की निगरानी, समय पर उपचार और एंटी-रेबीज वैक्सीन की उपलब्धता पर जोर देता है।
डॉग बाइट पीड़ितों के लिए मुआवजे की व्यवस्था
हरियाणा में आवारा कुत्तों के काटने से घायल लोगों के लिए आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी है। राज्य सरकार की दयालु-2 योजना के तहत पात्र पीड़ित निर्धारित शर्तों के अनुसार सहायता के लिए आवेदन कर सकते हैं।
हरियाणा सरकार की 22 अक्टूबर 2026 की एक आधिकारिक सूचना के अनुसार, डॉग बाइट पीड़ितों को घटना की तारीख से 90 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है। सहायता की राशि चोट की प्रकृति और अन्य निर्धारित मानकों के अनुसार तय की जाती है।
बढ़ती घटनाओं पर नियंत्रण की चुनौती
डॉग बाइट के मामलों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल अस्पतालों में रिकॉर्ड रखना पर्याप्त नहीं होगा। इसके साथ आवारा कुत्तों के टीकाकरण, नसबंदी, शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है।
हरियाणा में आवारा कुत्तों से जुड़ी शिकायतों के निपटारे के लिए समय-सीमा तय करने का प्रस्ताव भी सामने आया था। इसके तहत स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि राज्य सरकार डॉग बाइट के मामलों की अनिवार्य रिपोर्टिंग को लेकर कब और किन शर्तों के साथ आधिकारिक अधिसूचना जारी करती है। नियम लागू होने पर अस्पतालों और संबंधित विभागों को नई व्यवस्था के अनुसार काम करना होगा।

