हरियाणा में 1 नवंबर से लागू होगी नई प्रॉपर्टी टैक्स पॉलिसी, 31 अक्टूबर तक पुराने रेट पर भुगतान का मौका
Yuva Haryana: हरियाणा में संपत्ति कर यानी प्रॉपर्टी टैक्स की नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से नगर निगम क्षेत्रों में लागू होने जा रही है। इसके बाद मकान, दुकान और अन्य संपत्तियों का टैक्स नई नीति के तहत निर्धारित किया जाएगा। रोहतक नगर निगम ने संपत्ति मालिकों और कब्जाधारियों से अपील की है कि वे 31 अक्टूबर तक पुरानी नीति के अनुसार टैक्स जमा कर दें। नई व्यवस्था का उद्देश्य संपत्ति कर के आकलन को अधिक पारदर्शी, तर्कसंगत और संपत्ति के वास्तविक उपयोग के अनुरूप बनाना है।
1 नवंबर से बदल जाएगा टैक्स तय करने का तरीका
नई नीति के तहत संपत्ति कर की गणना केवल संपत्ति के प्रकार के आधार पर नहीं होगी, बल्कि उसकी पूंजीगत कीमत, लागू टैक्स दर और उपयोग के आधार पर तय होने वाले गुणक को ध्यान में रखा जाएगा। यानी संपत्ति का आकार, उसका उपयोग और संबंधित क्षेत्र की निर्धारित कलेक्टर दर टैक्स के आकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
हरियाणा सरकार ने संपत्तियों को आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, संस्थागत और अन्य श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया है। इससे मकान, दुकान, कार्यालय, औद्योगिक इकाई और संस्थानों पर उनकी श्रेणी के अनुसार टैक्स निर्धारित किया जा सकेगा।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत संपत्ति का टैक्स निर्धारित करने के लिए यह सूत्र इस्तेमाल किया जाएगा:
संपत्ति कर = पूंजीगत मूल्य × लागू टैक्स दर × उपयोग आधारित गुणक।
रोहतक में आवासीय और गैर-आवासीय संपत्तियों की दरें
रोहतक नगर निगम आयुक्त सत्येंद्र दुहन के अनुसार, रोहतक को नगर निगम की A-2 श्रेणी में रखा गया है। नई नीति के तहत यहां आवासीय संपत्तियों के लिए आधार वार्षिक टैक्स दर 0.029 प्रतिशत और गैर-आवासीय संपत्तियों के लिए 0.09 प्रतिशत निर्धारित की गई है।
गैर-आवासीय श्रेणी में व्यावसायिक और अन्य निर्धारित संपत्तियां शामिल हो सकती हैं। हालांकि, किसी संपत्ति पर वास्तविक टैक्स कितना बनेगा, यह उसके पूंजीगत मूल्य, उपयोग और लागू नियमों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल आधार दर देखकर अंतिम टैक्स का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
महिलाओं और दिव्यांग संपत्ति मालिकों को मिल सकती है छूट
नई नीति में कुछ श्रेणियों के लिए टैक्स छूट और रियायतों का प्रावधान भी किया गया है। अधिसूचना में निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले धार्मिक संस्थानों, सरकारी अस्पतालों, सरकारी शैक्षणिक संस्थानों, गौशालाओं और कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली जमीन को छूट मिल सकती है।
इसके अतिरिक्त, महिलाओं के नाम पर दर्ज आवासीय संपत्तियों, दिव्यांग संपत्ति मालिकों और समय पर टैक्स जमा करने वाले करदाताओं के लिए भी निर्धारित नियमों के अनुसार रियायतें दी गई हैं। जीरो-वेस्ट प्रबंधन व्यवस्था अपनाने वाली ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों को भी अतिरिक्त छूट का लाभ मिल सकता है।
इन रियायतों का लाभ लेने के लिए संबंधित पात्रता और शर्तें पूरी करना जरूरी होगा। संपत्ति मालिकों को अपनी श्रेणी के अनुसार लागू नियमों की जानकारी नगर निगम या आधिकारिक पोर्टल से प्राप्त करनी चाहिए।
टैक्स बढ़ने पर कुछ संपत्तियों को राहत
नई नीति में कुछ आवासीय और औद्योगिक संपत्तियों के लिए टैक्स में बढ़ोतरी की सीमा तय करने का भी प्रावधान है। हरियाणा सरकार के प्रॉपर्टी टैक्स कैलकुलेटर के अनुसार, निर्धारित श्रेणियों में आने वाली आवासीय संपत्तियों के लिए बढ़ोतरी पर चरणबद्ध सीमा लागू हो सकती है।
हालांकि, यह राहत हर संपत्ति पर समान रूप से लागू नहीं होगी। मकान या फ्लैट का आकार और संपत्ति की श्रेणी इस बात को प्रभावित करेगी कि नई व्यवस्था के तहत टैक्स में कितनी बढ़ोतरी हो सकती है।
ऑनलाइन पोर्टल पर देख सकते हैं टैक्स
रोहतक नगर निगम के अनुसार, नई नीति से संबंधित अधिकांश आवश्यक जानकारी पोर्टल पर अपडेट की जा चुकी है। संपत्ति मालिक हरियाणा के आधिकारिक प्रॉपर्टी टैक्स पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण देखकर अनुमानित टैक्स की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
आधिकारिक पोर्टल: https://property.ulbharyana.gov.in/
संपत्ति मालिकों को सलाह दी गई है कि वे पोर्टल पर दर्ज अपनी संपत्ति का क्षेत्रफल, उपयोग, मालिकाना विवरण और अन्य जानकारी जांच लें। यदि रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो उसे समय रहते ठीक कराने के लिए संबंधित नगर निगम से संपर्क करें।
31 अक्टूबर से पहले भुगतान करना जरूरी
पुरानी नीति के तहत टैक्स जमा करने का विकल्प 31 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध है। इसके बाद नई व्यवस्था के अनुसार भुगतान करना होगा। इसलिए रोहतक सहित संबंधित नगर निगम क्षेत्रों के संपत्ति मालिकों को सलाह दी गई है कि वे अंतिम तारीख से पहले अपने बकाया टैक्स और संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड की जांच कर लें।
नई नीति का वास्तविक असर संपत्ति की श्रेणी, मूल्य और लागू रियायतों पर निर्भर करेगा। ऐसे में भुगतान करने से पहले आधिकारिक पोर्टल पर टैक्स की गणना और लागू नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

