Yuva Haryana : हरियाणा में पिछले दो दिनों से हो रही बेमौसम बरसात किसानों के लिए आफत बन गई है। आंधी और बरसात के कारण प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में फसलों को नुकसान पहुंचा है। जहां खेतों में पक्की पकाई फसलें बिछ गई है तो वहीं मंडियों में पहुंची फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
विभिन्न प्रमुख अखबारों में प्रकाशित खबरों के अनुसार हरियाणा के 12 से ज्यादा जिलों में बारिश के चलते मंड़ियों में करीब 14 लाख क्विंटल धान व बाजरा भीग गया, जो कि खुले में रखा हुआ था।
हरियाणा के फतेहाबाद, करनाल और यमुनानगर जिले में सबसे ज्यादा नुकसान का अनुमान है। मंडियों में उचित प्रबंध न होने के चलते करनाल में 9 लाख क्विंटल, फतेहाबाद में डेढ़ लाख क्विंटल और यमुनानगर में 60 हजार मीट्रिक टन धान बारिश में भीग गया। हालांकि, प्रशासन द्वारा तिरपाल से फसल बचाने के प्रयास किए गए, लेकिन तेज बरसात में यह व्यवस्था कोई काम नहीं आई।
प्रदेश के कई जिलों में मंडियों से फसल का उठान नहीं होने के चलते धान और बाजरे का खराबा हुआ है। साथ ही धान में नमी के चलते किसानों ने फसल सूखने के लिए खुले में रखी थी, जिससे फसल को नुकसान पहुंचा।
किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा मंडियों में समय रहते बारिश से बचाव के इंतजाम नहीं किए गए। मौसम विभाग ने एक सप्ताह पहले ही बरसात का अलर्ट जारी कर दिया था, लेकिन प्रशासन ने कोई उचित कदम नहीं उठाए।
आपको यह भी बता दें कि बरसात के कारण मंडियों में फसल खरीद प्रक्रिया पर भी खासा असर पड़ा है। सोमवार को आई बरसात खरीद में बाधा बनी। इतना ही नहीं बारिश के चलते फिलहाल खेतों में कटाई भी रुक गई है। कई जगहों पर आढ़तियों ने किसानों के पास संदेश भेजकर सात अक्टूबर तक मंडियों में धान न लाने की अपील की है।
सोमवार को हरियाणा के 16 जिलों में बारिश हुई है और मंगलवार को भी अधिकतर जिलों में बरसात है। इनमें यमुनानगर, अंबाला, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, सिरसा, फतेहाबाद, गुरुग्राम, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, पानीपत, मेवात, पलवल, सोनीपत और जींद जिले शामिल है।
मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा में विक्षोभ का असर आठ अक्टूबर तक रहेगा। इसके बाद दिन और रात के तापमान में तेजी से गिरावट देखने को मिलेगी।



