Yuva Haryana: गुरूग्राम के सेक्टर-29 स्थित किंगडम ऑफ ड्रीम्स से जुड़े मामले में हरियाणा सरकार को करीब ₹434.02 करोड़ के नुकसान की बात सामने आई है। हरियाणा लाकायुक्त की रिपोर्ट में सरकार ने इस रकम की वसूली करने और मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
मामला हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) की 5.66 एकड़ जमीन को ग्रेट इंडियन नौटंकी कंपनी (GINC) को लीज पर देने से जुड़ा है। कंपनी को 2009 में जमान पर किंगडम ऑफ ड्रीम्स शुरू करने के लिए 15 साल की लीज दी गई थी। यह परिसर 2022 में साल कर दिया गया था।
लीज के बाद किराया भुगतान में हुई देरी
कंपनी ने शुरूआत से ही किराए के भुगतान में डिफॉल्ट करना शुरू कर दिया था। जून 2022 तक किराया और बयाज मिलाकर बकाया राशि ₹107.15 करोड़ पंहुच गई थी। इसके बाद रिकवरी नाटिस जारी किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने करीब 1.34 एकड़ जमीन पर अतिरिक्त कब्जा किया था। इसके लिए कंपनी से ₹114.15 करोड़ की मांग की गई। जवाब नहीं मिलने के बाद जुलाई 2022 में लीज समाप्त कर दी गई और ₹100 करोड़ का जुर्माना भी लगाया गया।
अधिकारियों की भुमिका पर उठे सवाल
लोकायुक्त न्यायमूर्ति हरि पाल वर्मा की रिपोर्ट में HSVP के कई अधिकारियों की भुमिका पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कुछ अधिकारियों को मामले के लिए जिम्मेदार बताया गया, जबकि कुछ IAS अधिकारियों पर पर्याप्त निगरानी नहीं रखने का आराप लगाया गया है।
लोकायुक्त ने हरियाणा के मुख्यमंत्री से मामले में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज करने और कंपनी से ₹434.02 करोड़ की वसूली की सिफारिश की है। रिपोर्ट में मामले को CBI को सौंपने की जरूरत भी बताई गई है।
2007 में शुरू हुई थी प्रक्रिया
यह पूरा मामला 2007 में शुरू हुआ, जब HSVP ने गुरूग्राम के सेक्टर-29 में 5.66 एकड़ जमीन को लीज पर देने के लिए बोली आमंत्रित की थी। GINC ने बोली जीती और जमीन को ₹36 लाख प्रति माह के किराए पर 15 साल के लिए लीज पर लिया था।
लोकायुक्त की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की अनियमितताओं को लेकर राज्य विजिलेंस ब्यूरो ने भी पहले जांच की थी। रिपोर्ट में अधिकोरियों की कार्यप्रणाली और कंपनी को मिले लाभ को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
सरकार से रकम वसूलने की सिफारिश
लोकायुक्त की रिपोर्ट अब हरियाणा सरकार के सामने है। इसमें बकाया रकम की वसूली के साथ जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है, यह सरकार के निर्णय और संबंधित जांच पर निर्भर करेगा।

