Yuva Haryana : दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण का स्तर इतना बिगड़ चुका है कि अब सरकार पूरा सख्त रुख अपना चुकी है। हरियाणा में प्रदूषण पर सख्ती को बढ़ा दिया गया है।
एक तरफ जहां प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर किसानों की गिरफ्तारियां की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर पराली जलाने से किसानों को रोकने में नाकाम सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों पर गाज भी गिर रही है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के मुताबिक वीरवार को जींद में पराली जलाने वाले 35 किसानों को गिरफ्तार किया गया। वहीं फतेहाबाद में पराली जलाने से रोकने में नाकाम चार पुलिसकर्मी, हिसार में तीन नोडल अधिकारी, सिरसा के ऐलनाबाद में पटवारी और ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया गया है।
इतना ही नहीं फतेहाबाद में 23 अन्य पुलिसकर्मियों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए है। फतेहाबाद और जींद में यह कार्रवाई फसल अवशेष जलाने के मामलों में पिछले एक सप्ताह में आई तेजी के बाद की गई है।
ऐसा क्यों हो रहा ?
आपको बता दें कि दिल्ली एनसीआर में दिवाली के बाद प्रदूषण का स्तर लगातार बिगड़ता ही जा रहा है। हरियाणा के 16 शहरों की हवा खतरनाक हो चुकी है। वी
वीरवार को दिल्ली को पीछे छोड़ते हुए हरियाणा का बहादुरगढ़ देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा और रोहतक दूसरे स्थान पर रहा। इस सीजन में पहली बार हरियाणा के किसी शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 466 तक पहुंचा, जो कि बहादुरगढ़ में दर्ज किया गया। दिल्ली एनसीआर में ग्रेप-3 लागू है। ऐसे में बढ़ते प्रदूषण के बाद हरियाणा सरकार ने सख्तियां बढ़ा दी है।
अब अचानक पराली जलाने के मामले बढ़ते देख प्रशासन भी एक्टिव हो गया है। फतेहाबाद में इन दिनों पराली जलने के कुल 75 केस सामने आए है और इनमें जांच के बाद 19 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही 1.80 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। वहीं प्रदेश में जींद जिले में पराली जलाने के सबसे ज्यादा 132 मामले सामने आए है। ऐसे में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किसानों की गिरफ्तारियां की है। हालांकि, पुलिस द्वारा गिरफ्तार सभी किसानों को बाद में जमानत पर छोड़ भी दिया गया है।
डबवाली के गांव मांगेआना में एक किसान ने कृषि विभाग के एचकेआरएन के तहत लगे सुपरवाइजर पर पराली को आग लगाने की एवज में रिश्वत लेने की शिकायत दी थी। इस मामले में कृषि विभाग के अधिकारियों की जांच के बाद उप निदेशक कृषि विभाग ने कर्मचारी को हटाने के आदेश जारी किए है।
सरकार की ओर से नोडल अधिकारियों को एक सप्ताह तक फील्ड में रहकर पैट्रोलिंग और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश दिए गए है ताकि किसी भी क्षेत्र में पराली जलाने की घटना न हो सके।
कृषि एवं कल्याण विभाग के अनुसार पराली जलाने के मामलों में अभी तक 175 किसानों की रेड एंट्री दर्ज की गई है। 188 किसानों पर पुलिस केस दर्ज कराए गए हैं। 9.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है जिसमें से 7,05,000 रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। अभी तक 118 नोडल अधिकारियों व सुपरवाईजरों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।



