Yuva Haryana : हरियाणा में लंबे समय से पेंडिंग पड़े जमीन बंटवारे के मामलों को तेजी के साथ निपटाया जाएगा। इस काम को रफ्तार देने के लिए हरियाणा सरकार ने अधिकारियों को नए दिशा-निर्देश जारी किए है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रदेशभर में भूमि बंटवारे के मामलों के जल्द निपटारे को लेकर व्यापक योजना तैयार की है। इसके अनुसार अब हर सहायक कलेक्टर को हर महीने कम से कम 12 बंटवारा मामलों का निपटारा करना जरूरी होगा।
इन मामलों के निपटान की निगरानी के लिए अनुपालन की समीक्षा उपायुक्त, मंडलायुक्त और वित्तायुक्त स्तर पर हर माह की जाएगी और मासिक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
इसके अलावा जिन तहसीलदारों पर फिलहाल काम का बोझ कम है, उन्हें लंबित बंटवारा मामलों के निपटान के काम जुटाया जाएगा। वहीं राजस्व विभाग द्वारा अधिकारियों के लिए हर माह कम से कम 20 मामलों का लक्ष्य तय किया गया है।
अधिकारियों द्वारा जमीन से जुड़े बंटवारों के मामलों को आपसी सहमति से समाधान करने पर भी जोर दिया जाएगा और इसके लिए मुकदमेबाजी कम करने के लिए एफसीआर ने वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र लागू किया है।
सेवानिवृत्त अधिकारी गांव स्तर पर एडीआर शिविर आयोजित करेंगे और विवादित पक्षों को आपसी सहमति से समाधान के लिए प्रोत्साहित करेंगे। आपसी सहमति से हुए निपटारे पर 10 हजार रुपए का मानदेय भी दिया जाएगा।
वहीं नियमित न्याय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को हफ्ते में कम से कम तीन दिन राजस्व न्यायालय लगाने के आदेश दिए गए है। वहीं अन्य अधिकारियों को सप्ताह में पांच दिन न्यायालय लगाना जरूरी होगा।
इस संबंध में राजस्व विभाग ने एक अहम फैसला ये भी लिया है कि हर तीन महीने में बंटवारा मामलों से जुड़े अधिकारियों के कार्य पर समीक्षा की जाएगी और अच्छा काम करने वाले पांच अधिकारियों को अपनी पसंद की तहसीलों में तैनाती भी दी जा सकती है।



