Yuva Haryana : केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को खत्म कर नया ग्रामीण रोजगार कानून लाने की तैयारी कर रही है। सरकार ग्रामीण रोजगार को लेकर एक बड़ा बदलाव कर सकती है।
अब केंद्र सरकार नया कानून VB-G RAM G यानी विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) लाने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नए कानून के लिए ‘वीबी जी राम जी विधेयक’ संसद के शीतकालीन सत्र में ही लाए जाने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में 20 साल पहले बनी मनरेगा योजना और मौजूदा केंद्र सरकार द्वारा लागू की जाने वाली इस नई योजना वीबी-जी राम जी की तुलना होना शुरू हो गई है। चलिए आपको बताते है कि इस योजना का नाम बदलने के अलावा इसमें क्या-क्या बदल सकता है ?
VB-G RAM G से जुड़ी खास बातें
- मनरेगा में 100 दिन की रोजगारी की गारंटी थी, इसमें दिन बढ़ाकर 125 करने का प्रस्ताव है
- नए विधेयक में मजदूरी का पेमेंट भी बदले जाने का प्रावधान किया जा रहा है
- मनरेगा में 15 दिनों में पेमेंट होती है, नए कानून के तहत हर हफ्ते पेमेंट मिल सकती है
- दैनिक मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर या फिर किसी भी परिस्थिति में काम किए जाने के दिन से पंद्रह दिनों के भीतर किया जाएगा
- भुगतान में देर होने पर मुआवजा का प्रावधान नए कानून में भी बरकरार
- मनरेगा में 15 दिनों के बाद मजदूरी के भुगतान में देर होने पर हर रोज 0.05% की दर से मुआवजा देने का प्रावधान है, यह नई योजना में भी रहेगा
- मनरेगा में जहां अनस्किल्ड मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, अब नए कानून के अनुसार कई राज्य सरकारों को भी मजदूरी के भुगतान का बोझ साझा करना होगा
- केंद्र सरकार हर वित्तीय साल में हर राज्य के लिए रकम निर्धारित करेगी, अगर कोई राज्य अपने मानक आवंटन से अधिक रकम खर्च करता है तो अतिरिक्त खर्च राज्य सरकार को ही उठाना होगा
- खेती वाले सीजन में रोजगार गारंटी को अस्थायी तौर पर रोक दिए जाने का प्रावधान किया जा रहा, ताकि खेतों में काम न रुके
- खेती वाले पीक सीजन में इस अधिनियम के तहत कोई काम नहीं कराया जाएगा
आपको बता दें कि मनरेगा साल 2006 में लागू हुई थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक इस योजना पर 11.74 लाख करोड़ रुपए खर्च हो चुके है। इसमें से 7.8 लाख करोड़ रुपए साल 2014 से लेकर अब तक खर्च किए गए है।
एक प्रमुख समाचार में प्रकाशित जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार दो मुख्य वजह के चलते मनरेगा योजना को बंद करना चाहती है।
इसमें पहली वजह ये है कि आज ग्रामीण भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना बदल चुकी है। सरकार का मानना है कि साल 2006 में जब मनरेगा शुरू हुई थी, तब ग्रामीण गरीबी, बेरोजगारी बड़ी चुनौती थी। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी बेरोजगारी 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 4.86 प्रतिशत रह गई है।
वहीं दूसरी वजह ये बताई जा रही है कि गरीबी में गिरावट, डिजिटल भुगतान, बैंकिंग पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी के बावजूद मनरेगा में फर्जी काम, मशीनों का दुरुपयोग हुआ है। साल 2024-25 में करीब 194 करोड़ रुपए का दुरुपयोग सामने आया है। सिर्फ 7.6 प्रतिशत परिवार ही 100 दिन का रोजगार पूरा कर सके है।
ऐसे में नए कानून के तहत डिजिटल निगरानी रहेगी और इसमें धोखाधड़ी रोकने के प्रावधान भी किए जाएंगे।
अब ये जानना भी जरूरी है कि ये कानून लागू कब होगा ? आपको बता दें कि ये बिल जल्द संसद में पेश होगा। इसके बाद दोनों सदनों में चर्चा होने के बाद इस बिल पर मुहर लगेगी और फिर इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। फिर यह बिल लागू होगा।



