Yuva Haryana : हरियाणा सरकार द्वारा प्रदेश में मेडिकल बॉन्ड पॉलिसी लागू करने का रास्ता कठिन होता हुआ जा रहा है। इस नई नीति का पहले एमबीबीएस छात्रों ने जहां विरोध किया तो वहीं अब वे बॉन्ड पॉलिसी के लिए सहमति पत्र के फार्म भरने से भी पीछे हट रहे है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार हेल्थ यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस साल 2020 बैच 28 फरवरी को पास आउट हो रहा है। ऐसे में सरकार इन बैच पर मेडिकल बॉन्ड पॉलिसी लागू करने की तैयारी में जुटी हुई है।
हेल्थ यूनिवर्सिटी के अधीन कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज करनाल, शहीद हसन खां मेडिकल कॉलेज नूंह, भगत फूल सिंह मेडिकल कॉलेज खानपुर और पीजीआईएमएस में साल 2020 बैच के करीब 600 स्टूडेंट पास आउट हो रहे है।
सरकार ने इन विद्यार्थियों से मेडिकल बॉन्ड पॉलिसी की सहमति के लिए एक जनवरी को संबंधित कॉलेजों को फॉर्म भेजे थे। हैरानी की बात है कि अब तक किसी भी छात्र ने फॉर्म भरकर अपनी सहमति नहीं जताई है।
छात्रों का क्या कहना ?
- पॉलिसी को पढ़ने के बावजूद कुछ समझ नहीं आ रहा
- नौकरी से जुड़ी बातों की पूरी जानकारी नहीं है
- पॉलिसी में नियम और शर्तें स्पष्ट नहीं है
छात्रों की क्या मांग ?
- नियुक्ति का स्वरूप बताया जाए
- पदनाम बताया जाए
- कैडर के बारे में जानकारी बताई जाए
- संविदात्मक या स्थायी स्थिति स्पष्ट की जाए
- कार्य स्थल के बारे में जानकारी दी जाए
- अवकाश नियम स्पष्ट किए जाए
- हरियाणा के नियमित सरकारी डॉक्टरों के सेवा नियम लागू होंगे या नहीं ?
आपको बता दें कि साल 2020 में मेडिकल छात्रों ने इस बॉन्ड पॉलिसी के विरोध में आंदोलन किया था और पॉलिसी की सभी बातें स्पष्ट करने की मांग उठाई थी। छात्रों का अब भी यही कहना है कि वे सरकारी सेवा में जाने से इनकार नहीं कर रहे है, लेकिन नियम और शर्तें स्पष्ट होना जरूरी है।



