Yuva Haryana : हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं में पिछले चार साल में 91 प्रतिशत की कमी आई है। सर्दियों में दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित करने वाले प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर अभी काम बाकी है। राज्य में प्रदूषण नियंत्रण को लेकर औद्योगिक इकाइयों, सड़कों की सफाई और हॉटस्पॉट क्षेत्रों की निगरानी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
राज्य में 1,309 औद्योगिक इकाइयों की प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था की समीक्षा की गई है। इनमें से 1,117 इकाइयों में वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण लगाए जाने हैं। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण के लिए चिन्हित 1,162 किलोमीटर सड़कों में से 487 किलोमीटर का पुनर्विकास अभी बाकी है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण प्रबंधन से संबंधित उच्च स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक के बाद राज्य की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा में करीब 79.7 लाख टन धान की पराली पैदा होती है। इसके प्रबंधन में इन-सीटू, एक्स-सीटू और चारे के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

पराली प्रबंधन में बढ़ा एक्स-सीटू उपयोग
एक्स-सीटू पराली उपयोग 2023 में 13.2 लाख टन से बढ़कर 2025 में 21.9 लाख टन हो गया। वर्ष 2026 में इसे 27.1 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 9,000 मशीनों के लक्ष्य के मुकाबले 7,950 मशीनें खरीदी जा चुकी हैं। हॉटस्पॉट गांवों में निगरानी के लिए करीब 50 ड्रोन तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा सेंसर लगाने और इएसआरओ के मोबाइल ऐप के जरिए खेतों में आग की घटनाओं का जमीनी सत्यापन भी किया जाएगा।
थर्मल पावर प्लांट में बायोमास को-फायरिंग पर जोर
अगस्त 2026 तक ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास को-फायरिंग 5.89 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो निर्धारित 5 प्रतिशत के मानक से अधिक है। एनसीआर से बाहर प्रदेश के ईंट-भट्ठों में बायोमास को-फायरिंग 21.9 प्रतिशत है। इसे एक नवंबर से बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
सड़कों की सफाई और औद्योगिक इकाइयों पर निगरानी
सड़क की धूल को नियंत्रित करने के लिए चिन्हित 1,162 किलोमीटर में से 675 किलोमीटर का पुनर्विकास पूरा हो चुका है। 10 मीटर से अधिक चौड़ी सड़कों की सफाई के लिए 81 बड़ी और मध्यम रोड स्वीपिंग मशीनें तैनात हैं।
औद्योगिक समीक्षा में 192 इकाइयों को छूट या पर्याप्त प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था वाला पाया गया, जबकि 1,117 इकाइयों में उपकरण जरूरी बताए गए हैं। इनमें से 383 इकाइयों ने उपकरण खरीदने के आदेश दे दिए हैं।
इसके अलावा 500 वर्ग मीटर से बड़े 3,211 निर्माण एवं विध्वंस स्थलों को निगरानी पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है।

