Yuva Haryana: हरियाणा की अनाज मंडियों में धान खरीद की धीमी रफ्तार किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। प्रदेश की 16 मंडियों में अब तक करीब 7.07 लाख टन धान की आवक हो चुकी है, लेकिन सरकारी एजेंसियों द्वारा केवल 1.38 लाख टन धान की खरीद की गई है। वहीं उठान (लिफ्टिंग) महज 21 हजार टन के आसपास पहुंचा है। ऐसे में करीब 6.86 लाख टन धान मंडियों में खुले में पड़ा हुआ है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब मौसम विभाग ने 7 से 12 अक्टूबर तक बारिश और बूंदाबांदी की संभावना जताई। यदि बारिश होती है तो खुले में रखा धान खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा।
कई जिलों में खरीद की रफ्तार बेहद धीमी
मंडी आंकड़ों के अनुसार कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, करनाल और यमुनानगर में धान की सबसे अधिक आवक दर्ज की गई है। हालांकि खरीद की गति अपेक्षाकृत धीमी रहने से मंडियों में धान के ढेर लगातार बढ़ रहे हैं।
कुरुक्षेत्र में लगभग 2.72 लाख टन धान की आवक के मुकाबले करीब 69 हजार टन खरीद हुई है, जबकि कैथल में 1.07 लाख टन से अधिक आवक के बावजूद खरीद 10 हजार टन से भी कम रही। कई जिलों में खरीद शुरू होने के बावजूद उठान की प्रक्रिया बेहद धीमी है।
किसानों का प्रदर्शन, प्रशासन से वार्ता
धान खरीद और उठान में देरी को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। शाहाबाद क्षेत्र में किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के साथ बैठक की। किसान संगठनों ने मंडियों में फसल के लंबे समय तक पड़े रहने पर चिंता जताई। बाद में प्रशासन द्वारा समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिए जाने के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
मिलरों पर कम कीमत पर खरीद की कोशिश का आरोप
कैथल सहित कुछ मंडियों में किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ राइस मिलर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दरों पर धान खरीदने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मौसम विभाग का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हरियाणा के कई जिलों में अगले कुछ दिनों के दौरान बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना है। पंचकूला, अंबाला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल, जींद और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
696 किसानों को ही भुगतान
सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक हजारों किसानों की फसल बिक चुकी है, लेकिन भुगतान प्रक्रिया अभी सीमित स्तर पर है। किसानों का कहना है कि खरीद, उठान और भुगतान तीनों प्रक्रियाओं में तेजी लाने की जरूरत है ताकि उन्हें आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।

