चार दिवसीय राज्यस्तरीय उत्सव में लोकनृत्य, रागिनी, फैशन शो और पारंपरिक कलाओं का होगा प्रदर्शन; कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय बनेगा सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र
Yuva Haryana: हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और लोकनृत्यों की झलक एक बार फिर रत्नावली महोत्सव में देखने को मिलेगी। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में 30 अक्टूबर से चार दिवसीय राज्यस्तरीय रत्नावली महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान हरियाणा की लोक संस्कृति के 33 अलग-अलग रंग मंच पर नजर आएंगे। प्रदेश के युवा कलाकार लोकनृत्य, रागिनी, संगीत, नाटक, फैशन शो और अन्य सांस्कृतिक विधाओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे।
महोत्सव का उद्देश्य हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देना और नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना है। आयोजन में पारंपरिक हस्तकलाओं और प्राचीन वस्तुओं से जुड़ी गतिविधियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
लोकनृत्य, रागिनी और फैशन शो रहेंगे खास आकर्षण
रत्नावली महोत्सव के संयोजक छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. एआर चौधरी के अनुसार, कार्यक्रम में हरियाणवी लोकगीत, भजन, पुरुष एकल नृत्य, भाषण प्रतियोगिता, रागिनी, समूह नृत्य और अन्य सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
महोत्सव में लोकनृत्य और रागिनी के साथ हरियाणवी फैशन शो भी दर्शकों का ध्यान खींचेगा। इसके अलावा, लोक परंपराओं और क्षेत्रीय कला को दर्शाने वाली प्रस्तुतियां होंगी। आयोजन में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ हरियाणा की सांस्कृतिक पहचान को समझने और आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक चलेगा आयोजन
रत्नावली महोत्सव 30 अक्टूबर से 2 नवंबर तक आयोजित होगा। चार दिनों के इस कार्यक्रम में अलग-अलग दिन विभिन्न सांस्कृतिक प्रतियोगिताएं और प्रस्तुतियां होंगी।
पहला दिन, 30 अक्टूबर: महोत्सव की शुरुआत के साथ लोकनृत्य, संगीत और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होगा। लोक संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों के माध्यम से कलाकार हरियाणा की परंपराओं को मंच पर पेश करेंगे।
दूसरा दिन, 31 अक्टूबर: इस दिन महिला एकल नृत्य, पुरुष एवं महिला लोकगीत प्रतियोगिताएं, हरियाणवी लोकगीत, स्किट और प्रहसन जैसी विधाओं से जुड़ी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। दोपहर बाद हरियाणवी फैशन शो और गजल सहित अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। शाम पांच बजे हरियाणवी कवि सम्मेलन और फैशन शो का आयोजन प्रस्तावित है। इसके साथ प्राचीन हरियाणवी कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का हिस्सा बनेगी।
तीसरा दिन, 1 नवंबर: इस दिन हरियाणवी चौपाल, मोनो एक्टिंग, समूह गीत और कविता से जुड़ी गतिविधियां होंगी। दोपहर दो बजे रागिनी समूह और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। विद्यार्थियों की गीत प्रतियोगिता के साथ हरियाणवी भांगड़ा और अन्य प्रस्तुतियां भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेंगी।
अंतिम दिन, 2 नवंबर: महोत्सव के अंतिम दिन समूह नृत्य और रागिनी प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। प्रतिभागियों को अपनी कला और प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा।
हस्तकला और पारंपरिक वस्तुओं की प्रदर्शनी भी होगी
रत्नावली महोत्सव में केवल मंचीय कार्यक्रम ही नहीं, बल्कि हरियाणा की पारंपरिक कलाओं को प्रदर्शित करने वाली गतिविधियां भी होंगी। लोक चित्रकला, हस्तकलाओं और पारंपरिक वस्तुओं से जुड़ी प्रदर्शनी में दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
ऐसी गतिविधियां स्थानीय कला और शिल्प को पहचान दिलाने के साथ युवाओं को पारंपरिक कलाओं के महत्व से परिचित कराने में मदद करती हैं।
नई पीढ़ी को हरियाणवी संस्कृति से जोड़ने की पहल
युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग के निदेशक प्रो. विवेक चावला के अनुसार, रत्नावली हरियाणा की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण मंच है। इसमें लोकगीत, रागिनी, नृत्य, नाटक, पारंपरिक वेशभूषा और चित्रकला जैसी विधाओं को शामिल किया गया है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में होने वाला यह आयोजन विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को समझने का अवसर देगा। चार दिनों तक चलने वाले रत्नावली महोत्सव में हरियाणा की लोक संस्कृति, कला और परंपराओं की विविधता देखने को मिलेगी।

