Yuva Haryana: रेवाड़ी जिले के बूढ़पुर स्थित राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के पूर्व प्रिंसिपल राजेंद्र कुमार शर्मा पर एक बड़ा फर्जीवाड़ा और वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के अनुसार, प्रिंसिपल ने स्कूल में शून्य (0) छात्र संख्या होने के बावजूद 100% रिजल्ट दिखाकर न केवल ‘शिक्षक पुरस्कार’ हासिल किया, बल्कि उसी अवॉर्ड के आधार पर 2 साल का सेवा विस्तार (सर्विस एक्सटेंशन) भी प्राप्त कर लिया।
0 विद्यार्थी, फिर भी 100% रिजल्ट दिखाकर लिया अवॉर्ड
हरियाणा बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, जब राजेंद्र कुमार शर्मा बूढ़पुर स्कूल में केमिस्ट्री शिक्षक के पद पर कार्यरत थे (1996-97), तब 12वीं कक्षा में केमिस्ट्री का एक भी विद्यार्थी नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने 100% परिणाम का झूठा दावा प्रस्तुत किया और 1998 में शिक्षक अवॉर्ड हासिल कर लिया।
इसी अवॉर्ड को आधार बनाकर उन्होंने 27 दिसंबर 2016 को सर्विस एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया, जिसे नियमों की अनदेखी करते हुए अप्रैल 2017 में मंजूरी दे दी गई।
नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं:
- उम्र सीमा का उल्लंघन: नियमों के अनुसार वेतन वृद्धि/सेवा विस्तार के लिए कर्मचारी की अधिकतम आयु 55 वर्ष होनी चाहिए, जबकि राजेंद्र को 60 साल की उम्र में वेतन वृद्धि और एक्सटेंशन दिया गया।
- फर्जी दस्तावेज: फिजिकल फिटनेस सर्टिफिकेट पर न तो सीएमओ (CMO) के हस्ताक्षर हैं और न ही इसका कोई रिकॉर्ड सर्विस बुक में दर्ज है।
- डिस्पैच नंबर में अंतर: एक्सटेंशन केस फाइल के डिस्पैच नंबर और स्कूल के डिस्पैच रजिस्टर के नंबर अलग-अलग पाए गए।
तबादले के बाद भी नहीं सौंपा चार्ज, 50 लाख के गबन का आरोप
6 सितंबर 2017 को प्रिंसिपल राजेंद्र का तबादला बूढ़पुर से राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल, कुंड में कर दिया गया था। 11 सितंबर को रिलीव होने के बावजूद उन्होंने नई प्रिंसिपल (संतोष कुमारी) को चार्ज नहीं सौंपा और 25 सितंबर 2019 तक बूढ़पुर स्कूल की स्टैम्प से ही सरकारी बिल पास करते रहे।
सर्वे व जांच में सामने आए प्रमुख गबन मामले:
कंप्यूटर लैब: 2015-16 में 11.60 लाख रुपये जारी हुए, लेकिन शून्य काम हुआ।
बास्केटबॉल ग्राउंड: 2015-16 में 4 लाख में से केवल ₹56,032 का काम कराया गया।
कमरों की मरम्मत: 2016-17 में 8 कमरों व बरामदे की मरम्मत के लिए 11.81 लाख जारी हुए, पर कोई काम नहीं हुआ।
चारदीवारी: 2016-17 में चारदीवारी निर्माण के लिए 18.82 लाख रुपये में से केवल 9.22 लाख का काम किया गया।
सीढ़ियां व बाउंड्री वॉल: 2017-18 में 14.12 लाख रुपये जारी किए गए, लेकिन काम अधूरा/ठप्प रहा।
प्रिंसिपल के कार्यकाल के दौरान कुल 50 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता पाई गई है।
संबंधित पक्षों के बयान
पूर्व प्रिंसिपल (संतोष कुमारी):
“मुझे प्राचार्य राजेंद्र शर्मा ने चार्ज नहीं सौंपा था। मेरा अब इसमें कोई रोल नहीं है और मेरा दूसरी जगह ट्रांसफर हो चुका है।”
आरोपी पूर्व प्रिंसिपल (राजेंद्र शर्मा):
“सभी आरोप निराधार हैं। मुझे बदनाम करने की साजिश रची जा रही है। इसकी पहले ही जांच हो चुकी है और रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी जा चुकी है।”
डीईओ, रेवाड़ी (राजेंद्र शर्मा):
“उच्च स्तर से मिले निर्देशों के तहत फाइल आगामी कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। उपायुक्त (DC) के निर्देशानुसार एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी।”

