Yuva Haryana: रोजाना ट्रैफिक जाम से जूझ रहे गुरुग्राम के यात्रियों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (GMDA) पुणे की तर्ज पर एक डेटा-संचालित कंजेशन मैनेजमेंट (भीड़ प्रबंधन) मॉडल अपनाने पर विचार कर रहा है। यह तकनीक ट्रैफिक हॉटस्पॉट की पहचान करने और उनका समाधान करने के लिए गूगल मैप्स के वाहन आवाजाही के डेटा का उपयोग करती है।
डीसी ने जीएमडीए सीईओ को लिखा पत्र
डिप्टी कमिश्नर (डीसी) निशांत कुमार यादव ने जीएमडीए के सीईओ पीसी मीना को पत्र लिखकर गुरुग्राम में इस मॉडल को अपनाने का सुझाव दिया है। 2 नवंबर को लिखे गए अपने पत्र में उन्होंने कहा कि पुणे शहर की ट्रैफिक पुलिस की इस पहल का गुरुग्राम की ट्रैफिक समस्याओं से सीधा संबंध है। डीसी ने समाधान प्रदाता (सॉल्यूशन प्रोवाइडर) द्वारा तैयार किया गया एक केस स्टडी भी इसके साथ संलग्न किया है।
क्या है पुणे का यह मॉडल और इसके फायदे?
पुणे ट्रैफिक पुलिस ने जनवरी 2026 में 964 सड़कों की लाइव मॉनिटरिंग शुरू की थी, जिसमें हर दो मिनट में डेटा रिफ्रेश होता है।
गूगल मैप्स के ‘रोड्स मैनेजमेंट इनसाइट्स’ सर्विस के डेटा का उपयोग करने वाले इस सॉफ्टवेयर-आधारित प्लेटफॉर्म के लिए किसी नए कैमरे, सेंसर या सिविल वर्क की आवश्यकता नहीं होती है।
इस अभ्यास से पता चला कि लगभग 5 प्रतिशत सड़क मार्ग शहर की ट्रैफिक देरी के लगभग आधे हिस्से के लिए जिम्मेदार थे। 20 से 30 दिनों के अवलोकन के बाद, लगातार रहने वाले ट्रैफिक बॉटलनैक (अवरोधों) को अस्थायी ट्रैफिक से अलग किया गया और बस स्टॉप, निर्माण कार्य, पार्किंग और जलभराव जैसी समस्याओं के कारणों की पहचान की गई।
पुणे पुलिस के अनुसार, प्रमुख कॉरिडोर पर औसत गति 20 किमी/घंटा से बढ़कर 26.8 किमी/घंटा हो गई, जो लगभग 34 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। हालांकि, डीसी ने यह भी कहा है कि पुलिस और समाधान प्रदाता द्वारा बताए गए इन आंकड़ों का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जाना आवश्यक है।
गुरुग्राम में मौजूदा स्थिति और आगे की योजना
डीसी ने बताया कि गुरुग्राम में अभी भी ट्रैफिक हॉटस्पॉट की पहचान मुख्य रूप से सार्वजनिक शिकायतों, फील्ड असेसमेंट और इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के तहत कैमरे की कवरेज के आधार पर की जाती है। शहर में भीड़भाड़ और सुधारात्मक उपायों के प्रभाव का आकलन करने के लिए कोई निरंतर मापा जाने वाला, नेटवर्क-व्यापी बेसलाइन मौजूद नहीं है।
इसके अलावा, उन्होंने अंडरपास में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव का भी जिक्र किया, जिससे पूरा ट्रैफिक ठप हो जाता है। इसे देखते हुए ग्रिडलॉक (पूर्ण जाम) का इंतजार करने के बजाय मौसम के पूर्वानुमान पर पहले से कार्रवाई करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
10 से 15 व्यस्त जंक्शनों पर चलेगा पायलट प्रोजेक्ट
प्रशासन ने गुरुग्राम के 10 से 15 अत्यधिक व्यस्त (क्रॉनिकली कंजस्टेड) जंक्शनों पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव रखा है।
जीएमडीए और गुरुग्राम ट्रैफिक पुलिस संयुक्त रूप से स्थानों की रैंकिंग करेंगी, मूल कारणों की पहचान करेंगी और इंजीनियरिंग ब्रीफ तैयार करेंगी।
संबंधित एजेंसियां सुधारात्मक कार्य करेंगी, और इसके प्रभाव का आकलन पहले और बाद के माप के जरिए किया जाएगा।

