हरियाणा में फूड सैंपल की जांच के लिए अब देने होंगे 100 रुपये, दिवाली से पहले मोबाइल लैब से मिलेगी सुविधा
Yuva Haryana: हरियाणा में खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच कराने के लिए अब आम लोगों को पहले के मुकाबले ज्यादा शुल्क देना पड़ सकता है। हिसार सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में चलने वाली मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में प्रत्येक सैंपल की जांच के लिए 100 रुपये फीस निर्धारित किए जाने की जानकारी सामने आई है। पहले यह शुल्क 20 रुपये था। दिवाली से पहले लोगों को उनके आसपास ही खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने की सुविधा देने के लिए मोबाइल लैब को सक्रिय किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध, घी, मसालों, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों में मिलावट की आशंका को देखते हुए लोगों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराना है। अब आम उपभोक्ता भी अपने घर में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों के सैंपल मोबाइल लैब में देकर उनकी शुरुआती जांच करवा सकेंगे।
20 रुपये से बढ़कर 100 रुपये हुई जांच फीस
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब में खाद्य पदार्थों के प्रत्येक सैंपल की जांच के लिए 100 रुपये शुल्क देना होगा। इससे पहले जांच की फीस 20 रुपये निर्धारित थी। मोबाइल लैब के जरिए उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की शुरुआती जांच कराने का अवसर मिलेगा।
हरियाणा सरकार ने पहले भी मोबाइल फूड टेस्टिंग वैन के माध्यम से लोगों को सस्ती दरों पर जांच सुविधा देने की योजना शुरू की थी। सितंबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, FSSAI की ओर से उपलब्ध कराई गई पांच मोबाइल वैन में एक सैंपल की जांच के लिए 20 रुपये शुल्क लिया जा रहा था। शुरुआती जांच का परिणाम करीब 10 से 12 मिनट में देने की व्यवस्था बताई गई थी।
बाजार, स्कूल और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पहुंचेंगी वैन
मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों को खाद्य पदार्थों की शुरुआती जांच के लिए हर बार किसी बड़ी प्रयोगशाला तक नहीं जाना पड़ेगा। ये वैन बाजारों, बस स्टैंड, स्कूल-कॉलेज, मेलों और अन्य भीड़भाड़ वाले स्थानों पर पहुंचेंगी।
इनमें दूध, मसाले, दाल, खाद्य तेल और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजों के सैंपल की जांच की जा सकती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौके पर ही नमूनों की प्राथमिक जांच कर सकेंगे। यदि किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट या गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी की आशंका मिलती है, तो नियमानुसार आगे की जांच और कार्रवाई की जा सकती है।
FSSAI की ‘Food Safety on Wheels’ योजना का उद्देश्य भी मोबाइल इकाइयों के माध्यम से आम लोगों तक खाद्य सुरक्षा जांच और जागरूकता की सुविधा पहुंचाना है। इन वैन का इस्तेमाल खाद्य पदार्थों में सामान्य मिलावट की जांच के साथ लोगों को सुरक्षित खानपान के प्रति जागरूक करने के लिए भी किया जाता है।
दिवाली से पहले मिलावट पर निगरानी तेज
त्योहारों के दौरान मिठाइयों, मावा, पनीर, घी, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ जाती है। इसी के साथ मिलावट की आशंका भी बढ़ती है। ऐसे में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से बाजारों और खाद्य प्रतिष्ठानों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है।
हरियाणा में दिवाली और छठ पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान भी तेज किया है। जिलों को मिठाई की दुकानों, डेयरियों और बाजारों से अतिरिक्त सैंपल लेने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का जोर खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने पर है।
जांच में गड़बड़ी मिलने पर होगी कार्रवाई
मोबाइल लैब में होने वाली जांच शुरुआती स्तर की होती है। यदि किसी सैंपल में मिलावट या मानकों के अनुरूप गुणवत्ता नहीं होने की आशंका सामने आती है, तो खाद्य सुरक्षा विभाग आगे की निर्धारित प्रक्रिया अपना सकता है। जरूरत पड़ने पर नमूने को विस्तृत जांच के लिए मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में भेजा जा सकता है।
इस व्यवस्था से उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के बारे में जागरूक होने में मदद मिलेगी। साथ ही दुकानदारों और खाद्य कारोबारियों पर भी मानकों का पालन करने का दबाव बढ़ेगा।

