Yuva Haryana: हरियाणा में बिजली वितरण क्षेत्र को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के रुख में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। जहां केंद्र सरकार देश भर में बिजली वितरण में कई निजी कंपनियों (Parallel Distribution Licensing) को अनुमति देने के पक्ष में है, वहीं हरियाणा सरकार ने अपने राज्य में ऐसा करने से कदम पीछे खींच लिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
बीती 19 अक्टूबर को हरियाणा के बिजली नियामक (Electricity Regulator) ने गुरुग्राम और नूह जिलों में एक निजी बिजली वितरक (Eleven Power Pvt। Ltd।) के प्रवेश को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प देना और सेवाओं में सुधार करना था। लेकिन 28 अक्टूबर को नियामक ने हरियाणा सरकार के निर्देशों के बाद इस समानांतर वितरण लाइसेंस (Parallel Distribution Licence) पर आगे न बढ़ने का फैसला किया। यह फैसला राज्य के सरकारी बिजली वितरण निगमों (Discoms) द्वारा अपनी वित्तीय स्थिति पर पड़ने वाले असर की चिंताओं को जताने और भारी विरोध के बाद आया है।
केंद्र सरकार की नीति और मुंबई का उदाहरण
यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार एक ऐसा ढांचा तैयार करने पर जोर दे रही है, जिससे एक ही क्षेत्र में कई बिजली वितरण कंपनियां काम कर सकें। केंद्र का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं के पास विकल्प बढ़ेंगे, सेवा की गुणवत्ता सुधरेगी और बुनियादी ढांचे का बेहतर उपयोग होगा। ‘ड्राफ्ट नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी, 2026’ और ‘ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अंडमेंट) बिल, 2025’ दोनों में समानांतर लाइसेंसिंग के प्रावधान हैं। वर्तमान में इस तरह की व्यवस्था केवल मुंबई (महाराष्ट्र) में है, जहां टाटा पावर, बेस्ट (BEST) और अडानी इलेक्ट्रिसिटी जैसी कंपनियां एक ही क्षेत्र में काम करती हैं।
हरियाणा सरकार का पक्ष और बिजली अधिनियम की धारा 108
हरियाणा सरकार ने इलेक्ट्रिसिटी एक्ट की धारा 108(1) का हवाला देते हुए हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में कोई भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न तो बनाया जाए और न ही चालू किया जाए।
राज्य सरकार ने उपभोक्ताओं के हितों, सार्वजनिक हित, सरकारी राजस्व पर पड़ने वाले असर और पहले से मौजूद सरकारी बिजली कंपनियों तथा कर्मचारियों के विरोध का हवाला दिया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य की मौजूदा नीति से पूरी तरह अलग था। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वह HERC के उस आदेश की सत्यता की जांच नहीं कर रही है जिसके तहत लाइसेंस दिया गया था। यदि यह लाइसेंस लागू हो जाता, तो मुंबई के बाहर देश में यह इस तरह का दूसरा मामला होता।

