हरियाणा में शिक्षकों की कमी के बीच दूसरे जिलों में भेजे जा रहे गेस्ट टीचर, 15,451 पद खाली
Yuva Haryana: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। प्रदेश में नियमित शिक्षकों के 15,451 पद खाली बताए गए हैं, जबकि 10,757 अतिथि शिक्षक यानी गेस्ट टीचर स्कूलों में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके बावजूद कुछ जिलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को दूसरे जिलों में ड्यूटी पर भेजे जाने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। उन्हें नए जिले में आने-जाने और रहने का खर्च अपनी जेब से उठाना पड़ सकता है।
शिक्षकों की कमी और अतिथि अध्यापकों की तैनाती के बीच तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं। जिन जिलों में शिक्षकों की जरूरत है, वहां अतिथि अध्यापकों को भेजा जा रहा है, लेकिन इससे उन शिक्षकों को व्यक्तिगत और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर लंबी दूरी तय करके ड्यूटी पर पहुंचने वाले शिक्षकों के लिए यह व्यवस्था चुनौतीपूर्ण है।
सरकारी स्कूलों में 15,451 पद खाली
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 15,451 पद खाली हैं। वहीं, 10,757 अतिथि शिक्षकों पर पढ़ाई की जिम्मेदारी है। प्रदेश के 1,049 सरकारी स्कूलों में केवल एक नियमित शिक्षक होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे स्कूलों में विद्यार्थियों की पढ़ाई, अलग-अलग कक्षाओं का संचालन और रोजमर्रा की शैक्षणिक गतिविधियां संभालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
शिक्षकों के रिक्त पदों का असर सभी जिलों में एक जैसा नहीं है। कुछ जिलों में शिक्षकों की कमी ज्यादा है, जबकि अन्य जगहों पर स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे में शिक्षक तैनाती की योजना बनाते समय जिले की जरूरत, स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या और उपलब्ध स्टाफ को ध्यान में रखना जरूरी है।
किन जिलों में ज्यादा है शिक्षकों की कमी ?
नूंह जिले में शिक्षकों के खाली पदों की संख्या काफी अधिक है। इसके अलावा यमुनानगर, पलवल, गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला और सिरसा जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में पद रिक्त बताए गए हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्य में शिक्षकों की जरूरत जिलावार अलग-अलग है।
ऐसी स्थिति में अतिथि शिक्षकों की तैनाती का उद्देश्य स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होने से रोकना हो सकता है। हालांकि, दूसरे जिले में ड्यूटी लगाने से पहले दूरी, यात्रा खर्च और संबंधित शिक्षक की परिस्थितियों पर भी विचार किया जाना जरूरी है। यदि किसी शिक्षक को नियमित रूप से लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, तो उसके लिए समय और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
अतिथि शिक्षक लंबे समय से कर रहे हैं सेवा
हरियाणा में अतिथि शिक्षक लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। उनका संगठन नियमितीकरण की मांग भी उठाता रहा है। अक्टूबर 2026 में अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर न्याय यात्रा शुरू की थी। इसके बाद मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ 2 नवंबर को बैठक का आश्वासन मिलने पर यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था।
अतिथि शिक्षकों की मांग और उनकी तैनाती से जुड़ा मुद्दा ऐसे समय में सामने आया है, जब सरकारी स्कूलों में नियमित शिक्षकों के रिक्त पद भरना भी अहम चुनौती बना हुआ है। शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए स्थायी भर्ती और उपलब्ध स्टाफ के बेहतर इस्तेमाल, दोनों पर ध्यान देना जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर ?
स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने पर विद्यार्थियों को विषयवार पढ़ाई और नियमित कक्षा संचालन में कठिनाई हो सकती है। एक ही शिक्षक पर कई कक्षाओं की जिम्मेदारी होने से पढ़ाने के लिए उपलब्ध समय भी सीमित हो सकता है। वहीं, दूसरे जिले में भेजे गए अतिथि शिक्षकों के लिए यात्रा और अतिरिक्त खर्च एक अलग समस्या बन सकते हैं।
इसलिए जरूरी है कि शिक्षा विभाग जिलों में खाली पदों और स्कूलों की वास्तविक जरूरत का आकलन करे। साथ ही, अतिथि शिक्षकों की तैनाती से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता और व्यावहारिक परिस्थितियों को महत्व दिया जाए। नियमित पदों पर भर्ती की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ने से भी स्कूलों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, शिक्षकों की कमी और दूसरे जिलों में अतिथि अध्यापकों की ड्यूटी का मुद्दा हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है। विभाग की ओर से जिलावार तैनाती और रिक्त पदों की स्थिति पर स्पष्ट जानकारी आने से इस व्यवस्था को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।

