Yuva Haryana: हरियाणा सरकार ने सरकारी खर्च पर विदेश जाने वाले अधिकारियों के लिए नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया है। अब अधिकारियों के लिए विदेश यात्रा की मंजूरी हासिल करना आसान नहीं होगा। प्रदेश सरकार ने आधिकारिक विदेश दौरों की स्वीकृति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए मुख्य सचिव कार्यालय की जांच अनिवार्य कर दी है। अब कोई भी विभाग विदेश यात्रा का प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री के पास नहीं भेज सकेगा।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत विदेश यात्रा के प्रत्येक प्रस्ताव को तीन प्रमुख कसौटियों पर परखा जाएगा।
तीन प्रमुख कसौटियां, जिन पर परखा जाएगा प्रस्ताव
- प्रशासनिक जरूरत और संभावित लाभ: विदेश जाने की प्रशासनिक जरूरत क्या है और उससे क्या संभावित लाभ मिलने की उम्मीद है।
- अधिकारी का चयन और पात्रता: प्रस्तावित यात्रा के लिए संबंधित अधिकारी का चयन क्यों किया गया है और उसकी पात्रता क्या है।
- खर्च और बजट की उपलब्धता: विदेश दौरे पर कितना खर्च आएगा और इसके लिए विभाग के पास पर्याप्त बजट उपलब्ध है या नहीं।
इन तीनों पहलुओं की गहराई से जांच के बाद ही प्रस्ताव मुख्यमंत्री की मंजूरी के लिए आगे भेजा जा सकेगा।
आईएएस से लेकर बोर्ड-निगमों के अधिकारियों तक लागू होंगे नियम
- सरकार द्वारा की गई इस नई व्यवस्था का दायरा केवल आईएएस अधिकारियों तक सीमित नहीं रखा गया है। यह नियम सभी सरकारी विभागों, बोर्डों, निगमों और वैधानिक निकायों के अधिकारियों के आधिकारिक विदेश दौरों पर लागू होंगे।
- विदेशी प्रतिनिधिमंडलों में भागीदारी, अध्ययन यात्राएं, प्रशिक्षण कार्यक्रम, आधिकारिक बैठकें, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और सेमिनारों में शामिल होने के सभी प्रस्ताव अब जांच के दायरे में आएंगे।
- अधिकारी चाहे किसी भी विभाग या संस्थान से जुड़ा हो, अगर वह सरकारी काम से विदेश जाना चाहता है, तो उसे यह निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी ही होगी।
सरकारी खजाने पर खर्च का देना होगा पूरा हिसाब
विदेश यात्रा के प्रस्ताव में अनुमानित खर्च और बजट की उपलब्धता का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा। मुख्य सचिव कार्यालय यह जांचेगा कि इस यात्रा पर सरकारी खजाने से कितना पैसा खर्च होगा और संबंधित विभाग के पास इसके लिए पर्याप्त बजट है या नहीं। विदेशी सहयोग विभाग के माध्यम से आने वाले प्रस्ताव भी पहले मुख्य सचिव कार्यालय को भेजे जाएंगे, और उसके बाद ही उन्हें मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जा सकेगा।
विदेश दौरों पर कोई रोक नहीं, बदली है प्रक्रिया
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अधिकारियों के विदेश दौरों पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई है और न ही दौरों की कोई संख्या तय की गई है। बदलाव केवल स्वीकृति की प्रक्रिया में किया गया है। पहले जहां विभागीय स्तर पर तैयार प्रस्ताव सीधे मुख्यमंत्री के पास भेजे जा सकते थे, वहीं अब मुख्य सचिव कार्यालय की पड़ताल अनिवार्य कर दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेश यात्राओं के औचित्य, अधिकारियों के चयन और सरकारी खर्च के प्रति जवाबदेही को पूरी तरह सुनिश्चित करना है।
पहले किए गए विदेश दौरों का भी देना होगा पूरा ब्योरा
- मुख्य सचिव कार्यालय प्रस्ताव की जांच करते समय संबंधित अधिकारी के कैडर नियमों और पात्रता के साथ-साथ उसके द्वारा पहले किए गए विदेश दौरों का रिकॉर्ड भी खंगालेगा।
- इससे यह पता लगाया जाएगा कि अधिकारी पहले कितनी बार विदेश जा चुका है और प्रस्तावित कार्यक्रम में उसकी भागीदारी कितनी जरूरी है।
- इसके अलावा यह भी देखा जाएगा कि अधिकारी की जिम्मेदारी और विशेषज्ञता का प्रस्तावित यात्रा से सीधा संबंध है या नहीं।
- अब केवल विभागीय सिफारिश या किसी अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र मिलने मात्र से ही विदेश जाने की मंजूरी नहीं मिलेगी।

