Yuva Haryana: हरियाणा में दसवीं और बारहवीं कक्षाओं के बोर्ड परीक्षा परिणामों को बेहतर बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ‘मिशन सफलता’ लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत राज्य के स्कूलों को उनके परिणामों के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों—रेड, येलो और ग्रीन जोन—में बांटकर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। विभाग का मुख्य उद्देश्य शून्य परिणाम वाले स्कूलों को पूरी तरह समाप्त करना, 100 फीसदी परिणाम देने वाले स्कूलों की संख्या को दोगुना करना और विद्यार्थियों के अंकों में सुधार करना है। स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं।
स्कूलों का वर्गीकरण और समीक्षा प्रक्रिया
रेड जोन (50% से कम परिणाम): मिड टर्म परीक्षा के परिणामों के आधार पर 50 फीसदी से कम परिणाम वाले स्कूलों को रेड जोन में रखा गया है। इन स्कूलों को अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए 30 दिन का समय मिलेगा और इन्हें अपनी सुधार योजना लागू करनी होगी। रेड जोन के स्कूलों में डाइट अधिकारी हर पखवाड़े (15 दिन में) दौरा करेंगे और हर पखवाड़े इन स्कूलों के प्रदर्शन की समीक्षा होगी। प्रत्येक ब्लॉक के सबसे कमजोर तीन स्कूलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
येलो जोन (50% से 80% परिणाम): 50 से 80 फीसदी तक परिणाम वाले स्कूलों को येलो जोन में रखा गया है। इन स्कूलों की मासिक समीक्षा आयोजित की जाएगी।
ग्रीन जोन (80% से अधिक परिणाम): 80 फीसदी से अधिक परिणाम वाले स्कूलों को ग्रीन जोन में शामिल किया गया है। ग्रीन जोन के स्कूलों को 100 फीसदी परिणाम हासिल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कमजोर स्कूलों और विद्यार्थियों के लिए विशेष उपाय
उत्कृष्ट शिक्षकों का सहयोग: हर तिमाही जिला स्तर पर एक से दो दिन की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जिसमें 100 फीसदी परिणाम देने वाले शिक्षक, कमजोर शिक्षकों को पढ़ाने के नए तरीके सिखाएंगे। उत्कृष्ट शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।
डिजिटल और विजिटिंग शिक्षक: यदि किसी स्कूल में विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो डिजिटल बोर्ड और प्रोजेक्टर के माध्यम से वीडियो लेक्चर दिखाए जाएंगे तथा नजदीकी स्कूलों से विजिटिंग शिक्षक भेजे जाएंगे।
अतिरिक्त कक्षाएं: अर्द्धवार्षिक परीक्षा के बाद कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उनके लिए अनिवार्य अतिरिक्त कक्षाएं लगाई जाएंगी। प्री-बोर्ड परीक्षा के बाद भी विषयवार कमियों को दूर किया जाएगा, और बोर्ड परीक्षा के बाद कंपार्टमेंट वाले विद्यार्थियों के लिए विशेष समर कैंप लगाए जाएंगे।
अभिभावकों की जवाबदेही और अन्य महत्वपूर्ण निर्देश
अभिभावक-शिक्षक बैठकें: स्कूलों में नियमित रूप से अभिभावक-शिक्षक बैठकें आयोजित होंगी. स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में सहयोग करेंगी, और स्कूलों को परिणाम, उपस्थिति एवं विद्यार्थियों की प्रगति का सत्यापन योग्य रिकॉर्ड रखना होगा।
बोर्ड परीक्षाओं तक गैर-शैक्षणिक ड्यूटी पर रोक: 1 जनवरी से बोर्ड परीक्षाएं समाप्त होने तक, गणतंत्र दिवस समारोह को छोड़कर, बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। इन कक्षाओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी गैर-शैक्षणिक ड्यूटी से छूट दी जाएगी।

