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भारत आए रूसी राष्ट्रपति, हरियाणा के अनेक परिवारों को पुतिन के दौरे से क्या उम्मीद ? जानें पूरी कहानी

Yuva Haryana : करीब चार साल बाद भारत के दौरे पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आए हैं। यह दौरा कई मायनों में खास है। पश्चिम और खासकर यूरोपीय देश पुतिन की इस यात्रा पर नजर बनाए हुए हैं।

इस बीच, हरियाणा के अनेक ऐसे परिवारों की भी पुतिन के भारत दौरे से उम्मीद जगी है, जिनके बेटे रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे हुए है।

एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित हुई जानकारी के अनुसार कई परिवार वालों ने भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय और विदेश मंत्रालय को आग्रह भेजकर मुद्दा रूस के शीर्ष नेतृत्व तक उठाने की मांग की है।

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इन परिजनों का कहना है कि एजेंटों ने झांसा देकर युवकों को पढ़ाई या नौकरी के नाम पर रूस भेजा था और फिर वहां के लोकल नेटवर्क ने धोखे से उन्हें रूसी सेना में भर्ती करवा दिया।

विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई एक जानकारी के अनुसार भी 44 भारतीय रूसी सेना में शामिल हुए है। लेकिन, परिजनों का मानना है कि ये संख्या ज्यादा है।

यहां तक कि रूस-यूक्रेन युद्ध में हरियाणा के दो युवकों की मौत भी हो गई। दरअसल, अक्टूबर माह में हिसार जिले के गांव मदनहेड़ी के सोनू की युद्ध के दौरान ड्रोन हमले में मौत गई थी। मौत से पहले सोनू ने अपने घर वालों आपबीती बताते हुए बताया था कि उसे जबरन रूसी आर्मी में भर्ती किया गया। छह अक्टूबर को रूस की सेना के एक अधिकारी का पत्र के जरिए सोनू की यूक्रेन में ड्रोन हमले में मौत की सूचना दी गई।


गांव मदनहेड़ी का ही एक और युवक अमन भी सोनू के साथ रूस गया था। सोनू की मौत के समय उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो में अमन ने अपने हालात बयां करते हुए भारत सरकार से गुहार लगाई थी कि गार्ड की नौकरी का झांसा देकर उसे रूस बुलाया गया था, लेकिन 10 दिन के प्रशिक्षण के बाद उसे युद्ध के मैदान में भेज दिया गया और रोज वहां मौत उसके सामने खड़ी होती है।

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इसी तरह इससे पहले सितंबर माह में कैथल जिले के कर्मचंद की भी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान बमबारी में मौत हो गई। जनेदपुर गांव के 22 वर्षीय कर्मचंद को जर्मनी जाना था, लेकिन एजेंट ने उसे रूस भेज दिया और वहां सेना में भर्ती कर उसे युद्ध के मैदान में उतार दिया गया।

इन दो घटनाओं के बाद हरियाणा के युवा जहां रूस जाने से कतराने लगे तो वहीं परिजन भी रूस में गए हुए अपने बच्चों की खबर लेने लगे। ऐसे में अनेक युवाओं के लापता होने के मामले सामने आए। लंबे समय से अनेक परिवार वालों का अपने बच्चों के साथ संपर्क नहीं हुआ है।

रोहतक के तैमूरपुर गांव के संदीप सितंबर 2024 में रूस गए थे। परिजनों का कहना है कि उनके बच्चे को पढ़ाई के साथ कुक का काम देने का वादा एजेंट ने किया था, लेकिन रूस पहुंचते ही उसके हाथ में बंदूक थमा दी गई। हाल ही में उसने एक वीडियो भेजा था कि उसकी जान को खतरा है। इस वीडियो के बाद परिजनों का अपने बेटे के साथ संपर्क नहीं हुआ है।

अंबाला के 32 वर्षीय मोहम्मद जावेद अगस्त 2025 में रूस गए थे। परिजनों के मुताबिक जावेद ने उन्हें बताया कि एजेंट ने उसे सेना में मजदूर के तौर पर भर्ती किया था, लेकिन 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद उसे बार्डर पर भेज दिया गया। ऐसे में थोड़े दिन पहले ही जावेद का फोन आया और उसने अपने परिवार को बच्चों और पत्नी का ख्याल रखने की बात कही। उसके बाद परिवार का जावेद के साथ कोई संपर्क नहीं हो रहा है।

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इसी तरह फतेहाबाद के कुम्हारिया गांव के दो युवक अंकित और विजय भी रूस में फंसे हुए हैं। परिवार का उनसे डेढ़ महीने से कोई संपर्क नहीं है।

ऐसे में इन परिवारों का यही कहना है कि भारत सरकार उनके बेटों को बचाए, क्योंकि वह रूस में पढ़ने गए थे, न कि मरने। एजेंटों ने ही उनके बच्चों के साथ धोखा करके उन्हें युद्ध क्षेत्र में भेज दिया है। ये सभी परिवार रूस में फंसे अपने बच्चों की एक झलक के इंतजार में बैठे है और अब इनकी पुतिन के दौरे से खासा उम्मीद जगी है।

First published on: December 05, 2025 04:20 PM

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