Yuva Haryana : हरियाणा के मानेसर लैंड स्कैम के मामले में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अन्य आरोपियों को पंचकुला सीबीआई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है।
दरअसल, भूपेंद्र हुड्डा सहित HUDA ( जो कि अब एचएसवीपी है) के तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारियों और निजी बिल्डरों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप तय हो गए है।
सीबीआई कोर्ट ने मामले में ट्रायल शुरू करने के लिए अभियोजन पक्ष के गवाहों को नोटिस जार कर दिए है। अब इस बहुचर्चित घोटाले में जल्द नियमित सुनवाई शुरू होने की संभावना है और दो मार्च को पहली गवाही दर्ज की जाएगी।
आपको बता दें कि इस बड़े मामले में दो फरवरी 2018 को चार्जशीट दाखिल की गई थी, अब करीब सात साल साल बाद गवाही की प्रक्रिया शुरु होने वाली है।
वहीं दो आरोपी अतुल बंसल और सुरजीत सिंह का निधन हो चुका है और इस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई को पहले ही खत्म कर दिया गया था।
मानेसर जमीन घोटाले में अब तक क्या हुआ ?
27 अगस्त 2004 को तत्कालीन इनेलो सरकार में करीब 912 एकड़ जमीन पर आईएमटी विकसित करने के लिए गुरुग्राम जिले के मानेसर, लखनौला और नौरंगपुर गांवों में भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी हुई थी।
आरोप है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के सीएम बनने के बाद आईएमटी परियोजना को रद्द कर दिया गया और सार्वजनिक प्रयोजन के तहत भूमि अधिग्रहण का नोटिस जारी किया गया।
आरोप है कि बिल्डरों ने भूमि अधिग्रहण का डर दिखाकर किसानों को अपनी जमीन बेहद कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर कर दिया गया था। बिल्डरों को 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा का फायदा पहुंचाया गया।
इस मामले में साल 2014 में भाजपा सरकार के दौरान सीबीआई ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत कई बिल्डर कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
17 सितंबर 2015 को भूपेंद्र हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई।
इसके अलावा अलग-अलग शिकायतों के आधार पर भूपेंद्र हुड्डा व अन्य आरोपियों के खिलाफ पांच एफआईआर दर्ज की गई थी।



