Yuva Haryana : हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों पर हुए लाठीचार्ज के मामले के खुलासे के बाद अब एचएयू एक और विषय को लेकर चर्चा में आया है। इस मामले में यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर विवाद में फंसते हुए नजर आ रहे है।
एक प्रमुख समाचार पत्र में प्रकाशित खबर के अनुसार एचएयू की सहायक प्रोफेसर डॉ दिव्या फोगाट की मौत के मामले में बड़ा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, तत्कालीन आयुक्त अशोक कुमार गर्ग की जांच रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी प्रशासन की भूमिका को संदिग्ध पाया गया है।
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि डॉ. फोगाट की पदोन्नति दो साल तक जानबूझकर रोकी गई और उनकी मृत्यु के बाद उसे मंजूरी दी गई।
वहीं इस मामले में इनेलो नेता अभय चौटाला ने बड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जांच में उपकुलपति बलदेव राज कंबोज न केवल पद के दुरुपयोग के दोषी पाए गए बल्कि वीसी ने दो युवा महिला वैज्ञानिकों के उत्पीड़न का भी दोषी पाया गया है।
उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट से हुए खुलासे से पता चलता है कि एक गोल्ड मेडलिस्ट होनहार युवा महिला वैज्ञानिक के साथ तो इस वीसी ने प्रताडऩा की सारी हदें ही पार कर दी थी, उस युवा महिला वैज्ञानिक की पदोन्नति तक रोक दी थी, जिसके कारण उस युवा महिला वैज्ञानिक को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
अभय ने कहा कि उपकुलपति बीआर कंबोज ने अपनी पत्नी को भी सारे नियमों को ताक पर रख कर गैर कानूनी तरीके से यूनिवर्सिटी के कैंपस स्कूल में पहले डेप्यूटेशन पर लगवाया उसके बाद उसी स्कूल का डायरेक्टर बनवा दिया था।
अभय चौटाला ने कहा कि उपकुलपति पर यूनिवर्सिटी में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार करने और फर्जी बिलों द्वारा पेंमट करने के घोटाले के भी गंभीर आरोप हैं। अपने हकों की जायज मांग कर रहे निर्दोष बच्चों पर लाठी चार्ज करवा कर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया था। ऐसे भ्रष्ट और दुराचारी व्यक्ति को एचएयू जैसी अति प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के उपकुलपति पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।
सरकार एचएयू के उप-कुलपति को तुरंत बर्खास्त कर इस पूरे मामले की कोर्ट के सिटींग जज द्वारा उच्च स्तरीय जांच करवाए ताकि दोषी उप-कुलपति को सजा मिल सके और एचएयू को बर्बाद होने से बचाया जा सके साथ ही पीड़ितों को न्याय मिल सके।



