हरियाणा में ट्रांसफर के इंतजार में बैठे कर्मचारियों को झटका, सरकारी सिस्टम की ‘कछुआ चाल’ बनी रोड़ा
Yuva Haryana : हरियाणा में ट्रांसफर के इंतजार में बैठे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के लिए एक निराशा वाली खबर है। दरअसल, सरकारी विभागों में ऑनलाइन तबादलों को लेकर अधिकारियों की गंभीरता पर सवाल उठे है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हरियाणा के सर्विस वेरिफिकेशन डेटा को अपडेट करने में लापरवाही सामने आई है, क्योंकि जमीनी स्तर पर कई विभाग अभी भी तैयारी से काफी दूर हैं।
यह खुलासा विभागों के स्टेट लेवल नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट में हुआ है। हैरानी की एक बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नायब सैनी के विभाग में भी अधिकारियों द्वारा सर्विस वेरिफिकेशन डेटा को अपडेट करने का काम बहुत धीरे चल रहा है।
इन विभागों की कछुआ चाल के कारण देरी संभव
जानकारी के मुताबिक सबसे ज्यादा पेंडेंसी आबकारी एवं कराधान विभाग में है, क्योंकि छह कैटेगरी के 652 कर्मचारियों का डाटा अभी तक वेरीफाई नहीं किया गया है।
वहीं श्रम विभाग में पांच पदों से जुड़े 326 कर्मचारियों का वेरिफिकेशन का काम अधूरा पड़ा है।
ऊर्जा विभाग में 36 कर्मचारियों का सर्विस डाटा अधर में लटका हुआ है।
इसी तरह खनन विभाग में 88, युवा मामलों विभाग के 82 और स्थानीय निकाय विभाग के 403 कर्मचारियों का वेरिफिकेशन नहीं हो पाया है।
ऐसे में विभिन्न विभागों द्वारा लगातार जिला और राज्य स्तर पर रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद कई विभाग डाटा अपडेट को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे। अधिकारी स्तर पर लापरवाही का सीधा असर कर्मचारियों की तबादला प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
खबर के मुताबिक विभिन्न विभागों ढीले रवैये के कारण पांच फरवरी को सभी विभागों में एक साथ ट्रांसफर करना संभव नहीं दिख रहा है, क्योंकि वेरिफिकेशन पूरा नहीं हुआ, तो कई विभागों में ट्रांसफर सूची जारी करना भी मुश्किल हो जाएगा।
आपको बता दें कि हरियाणा सरकार ने साल 2025 से सभी विभागों में ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने का फैसला ले रखा है। सरकार का कहना है कि पांच फरवरी को सभी विभागों में एक साथ तबादले किए जाएंगे, लेकिन बड़े पैमाने पर होने वाले इन तबादलों की तैयारी अब काफी ढीली चलने से सवाल खड़े हो रहे है।
एक साल बाद शुरू होने जा रही इस ट्रांसफर ड्राइव का लाखों कर्मचारियों का इंतजार है। राज्य में इस समय 2 लाख 73 हजार 301 सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं, जिन्हें मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर नीति का सीधा लाभ मिलना है, लेकिन कई विभागों की सुस्ती पूरे सिस्टम पर भारी पड़ रही है।



