Yuva Haryana: हरियाणा के भिवानी की 18 वर्षीय शिक्षिका मनीषा की मौत का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मनीषा के पिता संजय कुमार ने CBI की उस अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी है, जिसमें उसकी मौत को आत्महत्या बताया गया था। पिता ने पंचकूला स्थित CBI की विशेष अदालत में विरोध याचिका दाखिल कर मामले में आगे की गहन जांच की मांग की है।
पिता की ओर से 22 सितंबर को दाखिल याचिका में CBI की जांच और अंतिम रिपोर्ट पर कई सवाल उठाए गए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि जांच में कुछ फॉरेंसिक तथ्यों को नजरअंदाज किया गया और अलग-अलग पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए निष्कर्षों के बीच विरोधाभास है। परिवार ने मामले में हत्या और यौन उत्पीड़न की आशंका को भी पूरी तरह जांचे जाने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप परिवार की ओर से दाखिल याचिका में किए गए हैं और अदालत ने अभी इन दावों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
11 अगस्त को लापता हुई थी मनीषा
मनीषा 11 अगस्त 2025 को भिवानी के ढाणी लक्ष्मण गांव स्थित अपने घर से निकली थी। इसके बाद वह वापस नहीं लौटी। परिवार की तलाश के बाद 13 अगस्त को उसका शव सिंहानी गांव के पास नहर के नजदीक बरामद हुआ था। शव की स्थिति को लेकर परिवार ने शुरुआत से ही कई सवाल उठाए और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। बाद में मामला CBI को सौंपा गया।
मामले की जांच के दौरान मनीषा के शव का तीन बार पोस्टमार्टम किया गया। पहला पोस्टमार्टम भिवानी के सिविल अस्पताल में और दूसरा PGIMS रोहतक में हुआ। दोनों रिपोर्टों में जहर के कारण मौत होने की बात सामने आई थी। परिवार इन निष्कर्षों से संतुष्ट नहीं था, जिसके बाद दिल्ली स्थित AIIMS में तीसरा पोस्टमार्टम कराया गया।
AIIMS रिपोर्ट में गर्दन की चोट का उल्लेख
परिवार की विरोध याचिका के अनुसार, AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने मौत का कारण गर्दन के हिस्से में धारदार हथियार से लगी गंभीर चोट बताया था। रिपोर्ट में चेहरे और गर्दन की स्थिति को भी असामान्य बताया गया था। परिवार का कहना है कि यह निष्कर्ष पहले के पोस्टमार्टम में सामने आए जहर के निष्कर्ष से अलग था।
याचिका में केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है। परिवार का दावा है कि शव के पैरों के पास खिंचने के निशान पाए गए थे, जिससे यह संभावना उठती है कि शव को बरामदगी वाली जगह तक ले जाया गया हो। इन दावों की अंतिम पुष्टि अदालत या जांच एजेंसी द्वारा होना बाकी है।
CBI ने आत्महत्या को माना था मौत का कारण
CBI ने अगस्त 2026 में पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। जांच एजेंसी ने उपलब्ध मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि मनीषा की मौत कीटनाशक खाने से हुई और इसे आत्महत्या माना। CBI ने अपनी जांच में पहले के पोस्टमार्टम और एक बहु-विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड की राय को भी आधार बनाया था।
CBI की रिपोर्ट के अनुसार, जांच के दौरान मनीषा द्वारा कीटनाशक खरीदने से संबंधित रिकॉर्ड भी सामने आया था। एजेंसी ने मेडिकल बोर्ड की राय और अन्य जांच सामग्री के आधार पर हत्या की संभावना को खारिज किया था।
परिवार ने क्लोजर रिपोर्ट को दी चुनौती
CBI की रिपोर्ट के बाद मनीषा के पिता ने इसे स्वीकार नहीं किया और अदालत में विरोध याचिका दाखिल की। याचिका में परिवार ने जांच में कथित कमियों और अलग-अलग मेडिकल रिपोर्टों के बीच अंतर को प्रमुख आधार बनाया है। परिवार का कहना है कि इन बिंदुओं की दोबारा जांच की जानी चाहिए।
अब मामले में CBI को विरोध याचिका पर अपना जवाब दाखिल करना है। विशेष CBI मजिस्ट्रेट ने इसके लिए 28 सितंबर की तारीख तय की है। इसके बाद अदालत परिवार की आपत्तियों और CBI के जवाब पर आगे की कार्यवाही तय करेगी।

