देवीलाल परिवार और सियासी शक्ति प्रदर्शन, अजय-अभय के बाद अब चाचा रणजीत सिंह की बारी

Yuva Haryana : हरियाणा का बड़ा राजनीतिक घराना देवीलाल परिवार के सदस्यों द्वारा रैलियां करके अपनी सियासी ताकत दिखाने का दौर जारी है। हमेशा बड़ी-बड़ी रैलियां करके यह राजनीतिक परिवार अपना सियासी दम दिखाता है, इसलिए इन्हें रैलियों के आयोजन के लिए खासा माहिर माना जाता है। अजय और अभय चौटाला के सियासी प्रदर्शन के बाद अब पूर्व मंत्री चाचा रणजीत सिंह की बारी आ गई है।
फिलहाल, मुख्य तौर पर देवीलाल परिवार तीन खेमे में बंटा हुआ है। इसमें चौधरी देवीलाल के मंझले बेटे रणजीत सिंह, देवीलाल के पौत्र अजय चौटाला और अभय सिंह शामिल है।
देवीलाल के पोते एवं पूर्व सीएम ओम प्रकाश चौटाला के बड़े बेटे डॉ अजय सिंह चौटाला 2018 में इनेलो से अलग होकर बनी जननायक जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इनके छोटे भाई अभय चौटाला इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
25 सितंबर को चौधरी देवीलाल की जयंती पर इनेलो ने पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में रैली की और 7 दिसंबर को जेजेपी ने अपने 8वें स्थापना दिवस पर जुलाना में रैली करके अपनी ताकत दिखाई।
ऐसे में अब अजय-अभय के चाचा रणजीत सिंह भी नए साल पर हिसार में एक राज्य स्तरीय रैली करके अपना दम दिखाएंगे। कभी कांग्रेस, कभी भाजपा और अब निर्दलीय तौर पर राजनीति में एक्टिव रणजीत सिंह बड़ा राजनीतिक धमाका कर सकते है।
जानकारी के अनुसार हिसार रैली में रणजीत सिंह अपने समर्थकों की मौजूदगी में कोई बड़ा फैसला ले सकते है। वे अपने राजनीतिक भविष्य का रोडमैप अपने कार्यकर्ताओं के समक्ष रखेंगे।
रणजीत सिंह के राजनीतिक सफर की बात करें तो उनका सियासी अनुभव खासा लंबा रहा है। वे पहली बार 1987 में रोड़ी से विधायक बने और अपने पिता चौ. देवीलाल की सरकार में कृषि मंत्री भी रहे।
जब केंद्र की राजनीति में चौधरी देवीलाल एक्टिव हुए और साल 1989 में वे देश के उपप्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने अपने बड़े बेटे ओम प्रकाश चौटाला को हरियाणा की कमान देते हुए प्रदेश का सीएम बनाया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद रणजीत सिंह की राहे लोकदल से अलग होने लगी, क्योंकि वे भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में शामिल थे। हालांकि, देवीलाल ने उन्हें राज्यसभा सांसद भी बनाया था, लेकिन साल 1993 में लोकदल से किनारा करते हुए रणजीत सिंह कांग्रेस में चले गए।
इसके बाद वे कई बार रानियां से चुनाव लड़े, लेकिन जीत नहीं पाए। साल 2019 में वे बतौर निर्दलीय रानिया से चुनाव जीते और प्रदेश की बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार में बिजली और जेल मंत्री रहे। हालांकि, इस बीच उन्होंने भाजपा ज्वाइन करके साल 2024 में हिसार लोकसभा से चुनाव भी लड़ा, लेकिन कमल के चुनाव चिन्ह पर रणजीत कमाल नहीं कर पाए और चुनाव हार गए। इसके बाद साल 2024 में उन्होंने दोबारा निर्दलीय के तौर पर रानिया विधानसभा से चुनाव लड़ा, लेकिन वे फिर हार गए।
चुनाव हो या ना हो देवीलाल परिवार के सदस्य हमेशा राजनीति में सक्रिय रहते हैं। वे समय-समय पर बड़ी रैलियां करते रहते है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाया रहता है।
First published on: December 12, 2025 12:01 PM