Yuva Haryana: हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति को और अधिक धार दे दी है। इसके तहत अब कैथल, जींद और फतेहाबाद जिलों पर विशेष और अतिरिक्त फोकस बढ़ाया जाएगा। प्रशासन को अंदेशा है कि हालिया बारिश के बाद इन जिलों में फसल अवशेषों को जलाने के मामले ज्यादा सामने आ सकते हैं, जिसे लेकर संबंधित जिलों के डीसी (डिप्टी कमिश्नर) को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
केंद्रीय मंत्रियों के साथ उच्चस्तरीय मंथन
मंगलवार को हरियाणा के अधिकारियों की केंद्रीय मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक हुई, जिसमें राज्य सरकार द्वारा पराली प्रबंधन की दिशा में उठाए गए कदमों की पूरी जानकारी दी गई। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भूपेंद्र यादव ने हरियाणा सरकार के इन प्रयासों की खुलकर सराहना की।
तकनीक का सहारा: ड्रोन और सेंसर से होगी आठ पहर निगरानी
फसल अवशेष प्रबंधन को पुख्ता करने के लिए निगरानी तंत्र को तेजी से आधुनिक बनाया जा रहा है:
- राज्य में सुरक्षा और निगरानी के लिए 79 पीएम 5 सेंसर लगाए जा चुके हैं।
- गांवों में चौबीसों घंटे (आठ पहर) निगरानी बनाए रखने के लिए पहले से ही 20 ड्रोन कार्यरत हैं, और अब 30 और नए ड्रोन मंगाए जा रहे हैं, जिससे कुल ड्रोनों की संख्या 50 हो जाएगी।
- इसके अलावा, राज्यभर में 8,535 नोडल अधिकारी और विशेष पराली सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
किसानों के लिए ₹440 करोड़ की प्रोत्साहन राशि और आधुनिक मशीनें
कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने जानकारी दी कि सरकार किसानों को आर्थिक सहायता और आधुनिक तकनीक उपलब्ध करा रही है:
- फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रदेश में 66,050 आधुनिक मशीनें मुहैया कराई गई हैं।
- लगभग 37 लाख एकड़ धान क्षेत्र के प्रबंधन के लिए ₹440 करोड़ की अनुमानित प्रोत्साहन राशि तय की गई है।
- किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रति एकड़ ₹1,200 दिए जा रहे हैं।
- इसके साथ ही धान की सीधी बीजाई करने पर ₹4,500 और वैकल्पिक फसलों की बीजाई करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है।
- प्रशासन और सरकार के इन कड़े कदमों से उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार पराली जलाने के मामलों में उल्लेखनीय कमी आएगी।

