हरियाणा के 20 हजार किसानों को राहत, घरों में रखे अतिरिक्त धान की MSP पर बिक्री का रास्ता खुला; 48 घंटे में होगा सत्यापन
Yuva Haryana: हरियाणा में धान की सरकारी खरीद के बीच किसानों के लिए राहत की खबर है। जिन किसानों के खेतों में निर्धारित औसत उपज सीमा से अधिक धान पैदा हुआ है और उन्हें अतिरिक्त फसल बेचने में परेशानी आ रही है, उनके लिए सरकार ने रास्ता खोल दिया है। 30 अक्टूबर को ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर अतिरिक्त धान का विवरण दर्ज कराने के लिए लिंक खोला गया है। इसके जरिए किसान अपनी अतिरिक्त उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने की अनुमति मांग सकेंगे।
प्रदेश के करीब 20 हजार किसानों का अतिरिक्त धान घरों और खेतों में रखा हुआ है। ये किसान लंबे समय से मंडी में अपनी पूरी फसल बेचने की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे थे। अब आवेदन के बाद कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी 48 घंटे के भीतर दावे का सत्यापन करेंगे। जांच में किसान का दावा सही पाए जाने पर उसकी अतिरिक्त उपज की खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
मंडी सचिव के माध्यम से करना होगा आवेदन
अतिरिक्त धान बेचने के लिए किसानों को संबंधित मंडी सचिव के पास आवेदन देना होगा। आवेदन में किसान को अपनी फसल और जमीन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें आधार कार्ड और मोबाइल पर आने वाला ओटीपी भी जरूरी होगा।
मंडी सचिव किसान की ओर से दी गई जानकारी ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसके बाद आवेदन राजस्व और कृषि विभाग के पास सत्यापन के लिए जाएगा। अधिकारी किसान के खेत, पंजीकृत रकबे और फसल उत्पादन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करेंगे।
सरकारी व्यवस्था के अनुसार, आवेदन का सत्यापन 48 घंटे के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जांच में दावा सही मिलने पर किसान की अतिरिक्त फसल की खरीद के लिए पोर्टल पर संशोधित सीमा दर्ज की जाएगी। इससे किसान को अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्र पर बेचने का अवसर मिलेगा।
निर्धारित उत्पादन सीमा से ज्यादा धान होने पर आई परेशानी
इस खरीफ सीजन में धान खरीद के दौरान किसानों को निर्धारित प्रति एकड़ उत्पादन सीमा के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। सरकार ने फसल के पंजीकृत क्षेत्र और संबंधित इलाके की औसत उपज के आधार पर खरीद की मात्रा तय की है। कई किसानों का कहना है कि उनके खेतों में वास्तविक उत्पादन निर्धारित सीमा से अधिक हुआ है, लेकिन पोर्टल पर खरीद की अनुमति सीमित होने के कारण वे पूरी फसल नहीं बेच पा रहे।
किसानों के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह है कि धान को लंबे समय तक घर या खेत में रखना पड़ रहा है। इससे फसल में नमी और वजन घटने का खतरा बना रहता है। वहीं, धान को सुरक्षित रखने के लिए अतिरिक्त जगह और मजदूरी का खर्च भी उठाना पड़ रहा है।
किसानों को निजी खरीदारों के हाथों कम दाम पर बेचनी पड़ी फसल
कैथल और कुरुक्षेत्र सहित कई जिलों के किसानों ने फसल की खरीद में आ रही परेशानी बताई है। कुछ किसानों के अनुसार, पोर्टल पर निर्धारित उत्पादन सीमा के कारण उनकी पूरी फसल मंडी में नहीं बिक पाई। ऐसे में उन्हें कई दिनों तक धान घर पर रखना पड़ा।
कुछ किसानों ने मजबूरी में निजी खरीदारों को कम कीमत पर धान बेचा। इससे उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुकाबले आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। किसानों का कहना है कि जब खेत में उत्पादन अच्छा होता है तो निर्धारित सीमा से अधिक धान बेचने की अनुमति भी समय पर मिलनी चाहिए।
पहले भी दोबारा खोला गया था पोर्टल
हरियाणा सरकार ने खरीफ 2026 के दौरान फसल पंजीकरण से वंचित किसानों को राहत देने के लिए सितंबर में भी ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल दोबारा खोला था। 21 से 27 सितंबर तक किसानों को फसल का विवरण दर्ज कराने का मौका दिया गया था। इसके लिए किसानों को संबंधित एसडीएम कार्यालय में आवेदन देना था और राजस्व अधिकारियों के माध्यम से सत्यापन कराया जाना था।
सरकार का कहना है कि पोर्टल पर दर्ज फसल और जमीन का सही विवरण होने से सरकारी खरीद में पारदर्शिता बनी रहती है। इसी व्यवस्था के तहत इस बार भी फसल के रकबे और औसत उत्पादन का मिलान किया जा रहा है।
किसानों को सत्यापन पूरा होने का करना होगा इंतजार
अतिरिक्त धान की बिक्री के लिए पोर्टल पर लिंक खुलने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, केवल आवेदन करने से अतिरिक्त फसल की खरीद अपने आप मंजूर नहीं होगी। कृषि और राजस्व विभाग की जांच में किसान का दावा सही पाया जाना जरूरी होगा। सत्यापन के बाद ही पोर्टल पर खरीद की सीमा में बदलाव किया जाएगा।
किसानों के लिए जरूरी है कि वे आवेदन करते समय जमीन, फसल और उत्पादन से जुड़ी सही जानकारी दें और संबंधित मंडी सचिव से आवेदन की स्थिति की जानकारी लेते रहें। सरकार की इस प्रक्रिया का उद्देश्य पात्र किसानों की अतिरिक्त उपज को सरकारी खरीद में शामिल करना और उन्हें निजी खरीदारों को कम कीमत पर धान बेचने की मजबूरी से बचाना है।

