Yuva Haryana: हरियाणा के कैथल में धान खरीद को लेकर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। किसानों से 17% से अधिक नमी बताकर धान की कीमत कम करने और कट की राशि वसूलने के आरोप सामने आए हैं। सरकारी खरीद में धान का MSP 2,461 रुपये प्रति क्विंटल है, लेकिन कुछ मामलों में किसानों से 2,100 से 2,250 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर धान खरीदा गया।
इस तरह किसानों को 211 से 361 रुपये प्रति क्विंटल तक कम भुगतान किया गया। दूसरी ओर, किसानों के बैंक खातों में सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार पूरा MSP पहुंच रहा है और कम रेट पर खरीदी गई रकम की वसूली किसानों से आढ़तियों के जरिए की जा रही है।
नमी के नाम पर किसानों से कटौती
मंडी में धान खरीद के दौरान 17% से अधिक नमी को आधार बनाकर किसानों के धान की कीमत कम किए जाने की बात सामने आई है। कई किसानों का आरोप है कि लंबे समय तक धान की खरीद नहीं होने के कारण उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी।
कुछ मामलों में किसानों से कम रेट पर खरीद की गई, जबकि उनके खातों में MSP के हिसाब से पूरी रकम जमा हुई। इसके बाद अतिरिक्त राशि आढ़ती के पास जमा कराने के लिए किसानों पर दबाव बनाया गया।
पांच मामलों से समझिए किसानों को कैसे नुकसान पहुंचा
केस 1: कट के पैसे आढ़ती को देने पड़े
एक किसान ने बताया कि उसने 25 क्विंटल धान 200 रुपये कम रेट पर बेचने की बात बताई। खाते में MSP के हिसाब से पूरी रकम आने के बाद उसे कट की राशि आढ़ती के पास जमा करनी पड़ी।
केस 2: परेशानी में कम रेट पर बेचा
गांव के एक किसान के मुताबिक मंडी में धान की खरीद के लिए कई दिन इंतजार करना पड़ा। परेशान होकर उसे 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान बेचना पड़ा। MSP के हिसाब से आई अतिरिक्त रकम में से कट की राशि आढ़ती को देनी पड़ी।
केस 3: MSP से कम भाव पर खरीद, कच्ची पर्ची दी
निसिंग मंडी में एक किसान को आढ़ती की ओर से दी गई कच्ची पर्चियों के अनुसार धान की खरीद 2,090 और 2,250 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर हुई। यानी MSP से 211 से 371 रुपये प्रति क्विंटल तक कम रेट पर खरीद की गई।
केस 4: खरीद में देरी से बढ़ा दबाव
एक किसान ने बताया कि मिल कर्मचारी ने धान में दाने ज्यादा टूटे होने की बात कही। इसके चलते उसे करीब 2,150 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर फसल बेचनी पड़ी। खरीद में देरी के कारण फसल खराब होने का डर भी किसानों पर दबाव बढ़ा रहा है।
केस 5: नमी का बहाना
करनाल में एक किसान ने बताया कि धान में ज्यादा नमी बताकर उसे 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदने की बात कही गई। MSP के हिसाब से खाते में आने वाली अतिरिक्त राशि आढ़ती के पास जमा करने को कहा गया।
सरकारी एजेंसियों को MSP पर ही खरीद करनी चाहिए
कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों की ओर से सरकारी एजेंसियों से MSP पर ही धान खरीद सुनिश्चित करने की मांग की गई है। उनका कहना है कि धान में निर्धारित सीमा से अधिक नमी होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है, लेकिन किसानों से मनमाने तरीके से कम कीमत पर खरीद नहीं होनी चाहिए।
कम भाव पर खरीद के लिए दबाव बनाने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने लिखित शिकायत मिलने पर जांच और कार्रवाई की बात कही है।
खरीद नहीं होने पर कई जिलों में लगा जाम
धान की खरीद में देरी से नाराज किसानों ने यमुनानगर, जींद और कैथल समेत कई जिलों में प्रदर्शन और सड़क जाम किया। कुरुक्षेत्र के बाबैन में भी किसानों ने सड़क जाम किया। मामले को लेकर अधिकारियों ने खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

