Yuva Haryana: मानसून में कम बारिश के बावजूद किसानों ने अपनी मेहनत के बलबूते धान की बेहतर पैदावार तो कर ली है, लेकिन अब मंडियों में उन्हें उपज बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा तय की गई प्रति एकड़ औसत खरीद सीमा (Purchase Limit) के कारण किसान अपना पूरा धान नहीं बेच पा रहे हैं।
यमुनानगर, अम्बाला और जींद जिलों से किसानों की मांग अब मुख्य सचिव की बैठक और सरकार तक पहुँच चुकी है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कृषि विभाग को पत्र लिखकर इस संबंध में आवश्यक नीतिगत दिशा-निर्देश जारी करने को कहा है।
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री का आश्वासन
खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने किसानों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि जिन किसानों की जमीन में प्रति एकड़ उत्पादन निर्धारित खरीद लिमिट से ज्यादा हुआ है, उनके अतिरिक्त धान को भी खरीदा जाएगा। इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
क्यों पैदा हुई यह स्थिति?
धान की खरीद में गड़बड़ी और दूसरे राज्यों से अवैध धान की आवक को रोकने के लिए सरकार ने इस बार पहली बार जिलावार प्रति एकड़ औसत लिमिट तय की थी। लेकिन पैदावार अधिक होने के कारण किसानों का पूरा धान नहीं बिक पा रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट: किसानों का दर्द
32 क्विंटल तक हुआ उत्पादन (अम्बाला):
अमीपुर निवासी किसान हरजिंदर सिंह का कहना है कि वे गुरुवार को मंडी में धान लाए तो पता चला कि खरीद 26.26 क्विंटल प्रति एकड़ की सीमा के हिसाब से होगी। जबकि उनका उत्पादन 28 से 32 क्विंटल प्रति एकड़ हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि वे बची हुई अतिरिक्त फसल कहाँ बेचें?
कटाई रोकनी पड़ी:
अमीपुर के ही किसान गुरजेंट सिंह ने बताया कि उनके 1 एकड़ में 29 क्विंटल धान हुआ है। लिमिट के कारण 2 एकड़ की कटाई रोकनी पड़ी है। मार्केट कमेटी फॉर्म भरवा रही है, लेकिन अतिरिक्त खरीद पर फैसला अटका हुआ है।
स्थाई समाधान की मांग:
मोहड़ी के किसान कुलदीप सिंह के पास 30 एकड़ धान है और उत्पादन 32 क्विंटल प्रति एकड़ तक हो रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार को इसका स्थाई समाधान निकालना चाहिए ताकि किसान अपनी पूरी फसल बेच सकें।
प्रशासनिक कार्रवाई
जींद की डीसी डॉ. वैशाली शर्मा के अनुसार, किसान यूनियन द्वारा दिया गया ज्ञापन सरकार को भेज दिया गया है ताकि जल्द से जल्द दिशा-निर्देश मिल सकें।

