Yuva Haryana : चंडीगढ़ सेक्टर 26 स्थित ट्रांसपोर्ट लाइट्स पर लगा भारत का सबसे ऊंचा वायु शोधन टॉवर को गिराने के आदेश जारी हो गाए है। चार साल पहले ही इस टॉवर को शुद्ध वातावरण के लिए 1.5 करोड़ रुपए की लागत से खड़ा किया गया था।
एक तरफ जहां दिल्ली एनसीआर में खराब वायु प्रदूषण के चलते हाहाकार मचा हुआ है तो दूसरी तरफ अचानक चंडीगढ़ में शुद्ध वातावरण के लिए लगाए गए इस टॉवर को गिराने की खबर सामने आने के बाद हर कोई हैरान है कि आखिर इसे गिराया क्यों जा रहा है ? चलिए हम आपको बताते है…
चंडीगढ़ प्रशासन ने इस एयर प्यूरीफिकेशन टॉवर को गिराने के आदेश दिए है। दरअसल, चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति ने टॉवर लगाने वाली निजी कंपनी को तुरंत हटाने के आदेश दिए है। आदेश में कहा गया है कि इस 24 मीटर ऊंचे ढांचे को तुरंत यहां से हटाया जाए।
चंडीगढ़ प्रशासन ने एयर प्यूरीफिकेशन टावर की बिजली आपूर्ति भी काट दी है। दरअसल, सीपीसीसी बिजली के लिए हर महीने करीब 25 हजार रुपए का भुगतान कर रही थी, जिसके कारण चार वर्षों में इसका बिल 12 लाख रुपए हो गया।
आपको बता दें कि 7 सितंबर, 2021 को नीले आसमान के लिए स्वच्छ वायु का अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर इस टॉवर का उद्घाटन किया गया था और इस टॉवर को स्थापित करते वक्त बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बड़े-बड़े वादे किए गए।
निर्माण कंपनी का दावा था कि यह टावर 500 मीटर के दायरे में हवा को साफ करेगा। नाइट्रोजन, ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषकों को 50 प्रतिशत तक कम करेगा और 18 घंटे प्रतिदिन काम करेगा। टॉवर प्रदूषित हवा को अंदर खींचकर मिस्ट-स्प्रे सिस्टम उसे फिल्टर करके शुद्ध हवा में परिवर्तित करेगा।
लेकिन जब इस एयर प्यूरीफिकेशन टावर का राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) द्वारा जांच की गई तो पाया गया कि यह टॉवर बहुत ही सीमित क्षेत्र में प्रभावी है, जो कि कंपनी द्वारा किए गए दावे अनुसार पूरा फिट नहीं बैठता।
इसके बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने महीनों तक बिजली का खर्चा जारी रखा, क्योंकि कंपनी टॉवर हटाने के लिए समय-सीमा बढ़ाने की मांग करती रही।
सीपीसीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार जुलाई में तीन महीने की समय सीमा दी गई थी, जो कि अक्टूबर में समाप्त हो गई। लेकिन इसके बावजूद कंपनी लगातार और समय मांग रही है।
ऐसे में अब चंडीगढ़ प्रशासन ने कंपनी को तुरंत टावर हटाने के निर्देश दिए है और बिजली आपूर्ति काट दी है। हालांकि, टावर लगाने का खर्च कंपनी ने उठाया था, लेकिन बिजली बिल का भुगतान प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।



