हरियाणा से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’, 1 करोड़ किसानों तक पहुंचेगी सरकार; मिट्टी की सेहत और पराली प्रबंधन पर जोर
Yuva Haryana: केंद्र सरकार रबी सीजन 2026 के दौरान टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और किसानों की लागत कम करने के उद्देश्य से देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ शुरू कर रही है। अभियान की शुरुआत 22 अक्टूबर को हरियाणा के करनाल जिले के तरावड़ी से की जानी है। यह अभियान 30 नवंबर 2026 तक चलेगा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान इसके शुभारंभ कार्यक्रम में किसानों से संवाद करेंगे। सरकार का लक्ष्य अभियान के जरिए देशभर में करीब एक करोड़ किसानों तक पहुंचना है।
40 दिन तक गांव-गांव पहुंचेंगे कृषि विशेषज्ञ
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की ओर से चलाए जा रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक और टिकाऊ खेती के तरीकों के बारे में जागरूक करना है। इसके तहत राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर किसान सम्मेलन, किसान चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और खेतों में प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के संस्थान, कृषि विश्वविद्यालय और अन्य संबंधित संगठन मिलकर किसानों को नई तकनीकों की जानकारी देंगे। सरकारी योजना के अनुसार, अभियान में 4,150 से अधिक संयुक्त टीमें काम करेंगी। इनमें 12 हजार से अधिक कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की भागीदारी की योजना है।
मिट्टी की जांच के आधार पर खाद इस्तेमाल करने की सलाह
अभियान के दौरान किसानों को मिट्टी की जांच कराने और उसकी रिपोर्ट के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसका उद्देश्य रासायनिक खाद के असंतुलित उपयोग को कम करना और मिट्टी की सेहत को लंबे समय तक बनाए रखना है।
किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के बारे में भी बताया जाएगा, ताकि वे अपनी जमीन की जरूरत के अनुसार खाद और अन्य कृषि संसाधनों का इस्तेमाल कर सकें। संतुलित उर्वरक उपयोग से खेती की लागत को नियंत्रित करने और फसल की उत्पादकता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
पराली जलाने के बजाय उचित प्रबंधन पर जोर
धान की कटाई के बाद खाली होने वाले खेतों का बेहतर उपयोग और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन भी अभियान के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। किसानों को पराली जलाने से बचने तथा फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर खाद बनाने जैसे विकल्पों की जानकारी दी जाएगी।
इससे खेतों की मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने और पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। अभियान के दौरान प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, जैव-आधारित कृषि उत्पादों और बेहतर कृषि पद्धतियों के बारे में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
दलहन, तिलहन और बागवानी की खेती को मिलेगा बढ़ावा
सरकार फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने पर भी जोर देगी। इसके तहत किसानों को धान और गेहूं के अलावा दलहन, तिलहन तथा बागवानी फसलों को अपनाने के विकल्पों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, धान की कटाई के बाद खाली खेतों का उपयोग करने के तरीकों पर भी चर्चा होगी।
फसल विविधीकरण से किसानों को खेती के अलग-अलग विकल्पों को समझने और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसल चुनने में मदद मिल सकती है। हालांकि, फसल का चुनाव मिट्टी, पानी की उपलब्धता, मौसम और बाजार की मांग को ध्यान में रखकर करना जरूरी है।
जल संरक्षण और सरकारी योजनाओं की भी मिलेगी जानकारी
अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं के बारे में भी किसानों को जागरूक किया जाएगा। किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की प्रक्रिया समझाने और कृषि से जुड़ी नई तकनीकों तक उनकी पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।
सूचना के प्रसार के लिए स्थानीय भाषाओं में सामग्री के साथ रेडियो, दूरदर्शन और सोशल मीडिया जैसे माध्यमों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
किसानों की आय और खेती की लागत पर रहेगा फोकस
‘खेत बचाओ अभियान–रबी 2026’ का व्यापक उद्देश्य मिट्टी और पानी जैसे प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखते हुए खेती को अधिक टिकाऊ बनाना है। वैज्ञानिकों की सलाह, खेतों में प्रदर्शन और प्रशिक्षण के जरिए किसानों को संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
अभियान का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि किसानों तक सही जानकारी कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती है और वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुझाए गए तरीकों को किस हद तक अपनाते हैं।

