Yuva Haryana: हरियाणा कांग्रेस में जारी गुटबाजी और अंदरूनी खींचतान को लेकर पार्टी के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के हरियाणा प्रभारी संजय दत्त ने स्थिति स्पष्ट की है। ‘द ट्रिब्यून’ से बातचीत करते हुए दत्त ने स्वीकार किया कि गुटबाजी हरियाणा कांग्रेस के लिए एक चुनौती बनी हुई है, लेकिन इसे खत्म करने के लिए पार्टी में संगठनात्मक स्तर पर सुधार किए जा रहे हैं।
संजय दत्त ने कहा, “मेरे पास गुटबाजी खत्म करने की कोई जादू की छड़ी नहीं है, लेकिन इन मुद्दों पर काम चल रहा है। हम धीरे-धीरे, लेकिन निश्चित रूप से पार्टी में बदलाव, नवीनीकरण और सुधार करेंगे।” उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में सांगठनिक स्तर पर किए गए बदलाव अब धरातल पर दिखाई देने लगे हैं।
संगठन को मजबूत करने पर जोर
कांग्रेस की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए संजय दत्त ने कहा कि पार्टी अब शक्तियों के विकेंद्रीकरण और जिला स्तर पर कैडर को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस प्रक्रिया से पार्टी का संगठन जमीन पर अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनेगा।
2024 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की हार के लिए गुटबाजी को मुख्य कारण बताए जाने के सवाल पर दत्त ने कहा कि रातों-रात कोई जादुई समाधान संभव नहीं है। किसी भी राजनीतिक दल में विचारों का मतभेद होना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसे पार्टी के बड़े लक्ष्यों से अलग रखकर देखा जाना चाहिए।
“पार्टी में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन हमारे उद्देश्य और समर्पण में कोई अंतर नहीं है। मनभेद नहीं, केवल मतभेद है।”— संजय दत्त, AICC प्रभारी (हरियाणा)
भाजपा पर भी साधा निशाना
यह धारणा खारिज करते हुए कि गुटबाजी सिर्फ कांग्रेस में है, संजय दत्त ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तंज कसा। उन्होंने गुड़गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी ही सरकार और पार्टी पर सवाल उठाए थे, जो उनकी अंदरूनी खींचतान को दिखाता है।
उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस एक लोकतांत्रिक संगठन है, जहां कार्यकर्ताओं को अपने विचार व्यक्त करने की आजादी है, इसलिए यहां आंतरिक मतभेद अधिक स्पष्ट दिखाई देते हैं।
अहिरवाल क्षेत्र पर खास ध्यान
संजय दत्त ने कहा कि 2019 के चुनावों से पहले अहिरवाल क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ माना जाता था। पार्टी के पास इस इलाके में अपना पुराना जनाधार वापस पाने के लिए ‘विशेष योजनाएं’ हैं।
गौरतलब है कि संजय दत्त ने जून में बी. के. हरिप्रसाद की जगह हरियाणा के AICC प्रभारी का पदभार संभाला था। इससे पहले वे हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के सह-प्रभारी रह चुके हैं, जब पार्टी ने 2022 में वहां जीत दर्ज की थी।

