1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होगी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली; हरियाणा से अधिक से अधिक भीड़ जुटाने की तैयारी, 23 जिलों में वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी
Yuva Haryana: दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली कांग्रेस की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को सफल बनाने के लिए हरियाणा कांग्रेस ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। पार्टी ने पहले मौजूदा विधायकों और सांसदों को संगठनात्मक जिलों की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन अब उनकी जगह पूर्व सांसदों, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को जिला प्रभारी बनाया गया है। पार्टी का लक्ष्य हरियाणा से अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों को दिल्ली पहुंचाना है।
विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहने के निर्देश
रैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस संगठन ने जिला स्तर पर जिम्मेदारियों का पुनर्गठन किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा विधायकों को उनके अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय रहने देना जरूरी है, ताकि वे स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क कर सकें। वहीं, पूर्व जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं को संगठनात्मक जिलों में लोगों को जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में रैली की तैयारियां तेज की गई हैं। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने भी पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
23 संगठनात्मक जिलों में इन नेताओं को जिम्मेदारी
कांग्रेस की नई सूची के अनुसार, हरियाणा के विभिन्न संगठनात्मक जिलों में वरिष्ठ नेताओं को प्रभारी बनाया गया है। इनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सांसद, पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक शामिल हैं।
- गुरुग्राम: धर्मपाल मलिक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
- फरीदाबाद: डॉ. अशोक तंवर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष
- महेंद्रगढ़: कुलदीप शर्मा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
- दादरी: कैलाशो सैनी, पूर्व सांसद
- पानीपत: शादीलाल बत्रा, पूर्व सांसद
- झज्जर: सुभाष बत्रा, पूर्व मंत्री
- सोनीपत: आनंद सिंह डांगी, पूर्व मंत्री
- सिरसा: जसवंत सिंह बावल, पूर्व मंत्री
- पलवल: सुखवीर कटारिया, पूर्व मंत्री
- कुरुक्षेत्र: भीमसेन मेहता, पूर्व मंत्री
- हिसार: रामभज, पूर्व मंत्री
- अंबाला: सरदार निशान सिंह, पूर्व विधायक
- कैथल: प्रहलाद सिंह गिल्लाखेड़ा, पूर्व विधायक
- रेवाड़ी: सुखविंदर सिंह मांड़ी, पूर्व विधायक
- पंचकूला: कृष्ण कंबोज, पूर्व विधायक
- जींद: संत कुमार, पूर्व विधायक
- रोहतक: सुखबीर फरमाणा, पूर्व विधायक
- फतेहाबाद: शिवशंकर भारद्वाज, पूर्व विधायक
- भिवानी: कुलवीर बेनीवाल, पूर्व विधायक
- करनाल: रणधीर गोलन, पूर्व विधायक
- यमुनानगर: लहरी सिंह, पूर्व विधायक
- नूंह: बख्शीष सिंह विर्क, पूर्व विधायक
- हांसी: पदम सिंह दहिया, पूर्व विधायक
इन नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने और रैली में भागीदारी बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है।
1 नवंबर की रैली में क्या होंगे प्रमुख मुद्दे?
कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली को मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए जा रहे अपने राष्ट्रीय अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने से मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त और प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने कहा है कि रैली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई जाएगी। पार्टी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के अधिकार की सुरक्षा को अपना प्रमुख मुद्दा बता रही है।
वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता बढ़ाने पर जोर
जिला प्रभारियों में बदलाव को संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारियों के नए बंटवारे के रूप में देखा जा रहा है। पूर्व जनप्रतिनिधियों के पास राजनीतिक अनुभव और स्थानीय स्तर पर पुराने संपर्क हैं। कांग्रेस इन संपर्कों का इस्तेमाल कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और रैली के लिए लोगों को जुटाने में करना चाहती है।
रैली से पहले पार्टी की बैठकों में परिवहन, कार्यकर्ताओं के समन्वय और जिला स्तर पर प्रचार जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई है। नेतृत्व की कोशिश है कि हर जिले से पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक व्यवस्थित तरीके से दिल्ली पहुंचें।
अब रैली की तैयारियों पर रहेगी नजर
हरियाणा कांग्रेस के लिए 1 नवंबर की रैली संगठनात्मक ताकत दिखाने का अवसर भी है। जिला प्रभारियों की नई टीम के सामने अब अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने की चुनौती होगी।
रैली में हरियाणा से कितने लोग पहुंचते हैं और जिला स्तर पर पार्टी की तैयारियां कितनी प्रभावी रहती हैं, इससे इस रणनीतिक बदलाव के परिणामों का आकलन किया जा सकेगा।

