Yuva Haryana: हरियाणा के सरकारी मेडिकल कॉलेजों से एमबीबीएस करने वाले 2020 बैच के लगभग 150 डॉक्टरों के सामने पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) में दाखिला लेने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। कॉलेजों में मूल दस्तावेज जमा होने के कारण उन्हें दाखिले की प्रक्रिया पूरी करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन प्रभावित डॉक्टरों को नीट पीजी काउंसलिंग के पहले राउंड में ऑल इंडिया कोटे के तहत देश के विभिन्न राज्यों के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें मिली हैं।
बॉन्ड पॉलिसी का हवाला देकर दस्तावेज रोक रहे कॉलेज
डॉक्टरों को आगामी 2 नवंबर तक अपने मूल दस्तावेज जमा कराकर अपना दाखिला पक्का करना है। पीड़ित डॉक्टरों का कहना है कि कॉलेजों ने उनके मूल दस्तावेज अपने पास रखे हुए हैं, जिनमें इंटर्नशिप पूरा करने का प्रमाण पत्र, अटैम्प्ट सर्टिफिकेट और एमबीबीएस के चारों वर्षों की विस्तृत अंकतालिकाएं (मार्कशीट) शामिल हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, संशोधित बॉन्ड पॉलिसी के प्रावधान के तहत कॉलेजों के पास केवल विद्यार्थियों की डिग्री अपने पास रखने का नियम था, जबकि अन्य मूल दस्तावेज विद्यार्थियों के पास रहने चाहिए थे। इसके बावजूद कॉलेज बॉन्ड पॉलिसी का हवाला देकर उनके अन्य प्रमाण पत्र और अंकतालिकाएं भी वापस नहीं कर रहे हैं।
निदेशालय पहुंचे छात्र, मिला आश्वासन
इस समस्या को लेकर कई छात्र बुधवार को पंचकूला स्थित चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय पहुंचे और निदेशक से मुलाकात की। निदेशक धीरज खड़गटा ने आश्वासन दिया है कि वे वीरवार तक निदेशालय से रोहतक यूनिवर्सिटी को पत्र जारी करवा देंगे, ताकि समय पर डॉक्टरों को उनके दस्तावेज मिल सकें।
हालांकि, छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि वीरवार दोपहर तक उन्हें मूल दस्तावेज नहीं मिलते हैं, तो वे कड़ा रुख अपनाएंगे और जरूरत पड़ने पर उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे।

