सर्दी की शुरुआत के साथ बढ़ा प्रदूषण, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब; PM2.5 का स्तर बढ़ने से स्वास्थ्य पर खतरा
Yuva Haryana: सर्दी की शुरुआत के साथ दिल्ली-NCR और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का संकट गहराने लगा है। कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में पहुंच गई है, जिससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होने और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हरियाणा के गुरुग्राम क्षेत्र के पंचगांव में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 378 दर्ज किया गया, जो सूची में सबसे अधिक था। वहीं, उत्तर प्रदेश के हापुड़ और बड़ौत समेत कई शहरों में भी प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा रहा।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़े बताते है कि निगरानी वाले 254 शहरों में आधे से अधिक स्थानों पर हवा की गुणवत्ता चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। दिल्ली-NCR के 29 शहरों में से 13 शहरों की हवा खराब बताई गई है।
पंचगांव में AQI 378, कई शहरों में हालात चिंताजनक
प्रदूषण के स्तर वाले प्रमुख शहरों की स्थिति इस प्रकार रही:
- पंचगांव, गुरुग्राम: AQI 378
- हापुड़: AQI 328
- बड़ौत: AQI 328
- बागपत: AQI 282
- मानेसर: AQI 271
- चरखी दादरी: AQI 246
- अजमेर: AQI 244
- करनाल: AQI 242
- यमुनानगर: AQI 218
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदूषण का दबाव बना हुआ है। दिल्ली-NCR में सबसे खराब हवा वाले प्रमुख स्थानों में गुरुग्राम का पंचगांव और उत्तर प्रदेश के हापुड़ व बड़ौत शामिल हैं।
AQI जितना अधिक होता है, हवा में प्रदूषकों का स्तर उतना ही अधिक चिंता पैदा करता है। 301 से 400 के बीच का AQI ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है, जबकि 201 से 300 के बीच की हवा ‘खराब’ मानी जाती है।
हरियाणा के कई शहरों में 150 से ऊपर AQI
हरियाणा के कई शहरों में भी प्रदूषण बढ़ने की बात कही गई है। अंबाला में AQI 181, बहादुरगढ़ में 185, बल्लभगढ़ में 178, गुरुग्राम में 193, नारनौल में 153 और सिरसा में 184 दर्ज किया गया।
इसके अलावा पानीपत, रोहतक, सोनीपत, फरीदाबाद और फतेहाबाद में भी AQI 100 से अधिक रहने का उल्लेख किया गया है। ऐसे स्तर पर संवेदनशील लोगों को परेशानी हो सकती है, खासकर उन लोगों को जिन्हें पहले से सांस या हृदय संबंधी समस्या है।
दिल्ली-NCR के 29 शहरों में से 13 की हवा खराब
दिल्ली-NCR में शामिल हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 29 शहरों में से 13 शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब श्रेणी में दर्ज की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सबसे प्रदूषित स्थानों में तीन शहरों का AQI 300 से ऊपर था।
प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम में बदलाव जैसे कारक भूमिका निभा सकते हैं। सर्दियों में हवा की गति कम होने और प्रदूषकों के जमीन के करीब जमा होने से भी स्थिति बिगड़ सकती है। हालांकि, किसी खास दिन किसी शहर में प्रदूषण बढ़ने के कारणों की पुष्टि स्थानीय आंकड़ों से ही की जा सकती है।
PM2.5 बढ़ने से फेफड़ों पर असर
PM2.5 प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई गई है। PM2.5 बेहद छोटे कण होते हैं, जो सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इनके लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं।
खराब हवा के कारण आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?
प्रदूषण बढ़ने पर लोगों को स्थानीय AQI की जानकारी लेते रहना चाहिए। हवा बहुत खराब होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला, सही फिटिंग का N95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। सांस लेने में परेशानी या सीने में जकड़न जैसे लक्षण होने पर चिकित्सकीय सलाह लें।
कुल मिलाकर, सर्दी की शुरुआत के साथ दिल्ली-NCR और हरियाणा के कई शहरों में बढ़ता प्रदूषण चिंता का विषय है। आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता मौसम, हवा की गति और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों पर निर्भर करेगी।

