Yuva Haryana : हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए किसानों के रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की जाएगी और इसका असर किसान को अगले 15 महीने तक झेलना पड़ सकता है। हरियाणा सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था के तहत रेड एंट्री के कारण किसान को अपनी फसल बेचने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, राज्य सरकार ने इस संबंध में मसौदा तैयार किया है और इसे लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
15 महीने तक रिकॉर्ड में रहेगी रेड एंट्री
प्रस्तावित नियमों के अनुसार पराली जलाने वाले किसान के राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। यह एंट्री 15 महीने तक प्रभावी रहेगी। इस अवधि के दौरान किसान को फसल बेचने से जुड़ी प्रक्रियाओं में परेशानी आ सकती है। व्यवस्था का उद्देश्य पराली जलाने की घटनाओं को रोकना और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करना है।
हालांकि, किसान के लिए राहत का रास्ता भी रखा गया है। यदि किसान निर्धारित समय में दोबारा पराली नहीं जलाता और संबंधित नियमों का पालन करता है तो तय अवधि के बाद रेड एंट्री हटाई जा सकती है।
दोबारा पराली जलाई तो बढ़ सकती है अवधि
प्रस्तावित व्यवस्था में दोबारा पराली जलाने पर कार्रवाई और सख्त हो सकती है। यदि किसान 15 महीने की अवधि के भीतर दोबारा पराली जलाता है या निर्धारित जुर्माना नहीं भरता है तो रेड एंट्री की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यानी एक बार नियम तोड़ने के बाद दोबारा वही गलती करने पर किसान को लंबे समय तक इसका असर झेलना पड़ सकता है।
60 दिन तक आपत्ति का मौका
प्रस्तावित प्रक्रिया में किसान को कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखने का अवसर भी दिया जाएगा। रेड एंट्री दर्ज होने के बाद किसान को 60 दिन के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का मौका मिलेगा। इसके बाद संबंधित अधिकारी मामले की जांच करेंगे। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी किसान के खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई होने पर वह अपना पक्ष रख सके।
अधिकारियों पर भी कार्रवाई
पराली जलाने के मामलों में सिर्फ किसानों पर ही कार्रवाई नहीं हो रही है। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को नोटिस दिए गए हैं। इनमें कृषि विभाग, पंचायत विभाग, और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हैं। पिछले सीजन में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर 75 अधिकारियों को नोटिस दिए गए थे, जबकि कुछ मामलों में अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई।
पिछले सीजन में दर्ज हुए मामले
हरियाणा में खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को लेकर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। राज्य में पराली जलाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने, जुर्माना लगाने और किसानों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
इन मामलों के बीच सरकार अब ऐसी व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे पराली जलाने वाले किसानों को रिकॉर्ड भी दर्ज हो और भविष्य में दोबारा नियम तोड़ने पर कार्रवाई की जा सके।
किन जिलों में ज्यादा मामले सामने आए?
कई जिलों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें फतेहाबाद, हिसार, जींद, कैथल, करनाल, कुरुक्षेत्र, सिरसा और पानीपत जैसे जिले शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक कुछ जिलों में पिछले खरीफ सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं के साथ-साथ किसानों पर की गई कार्रवाई का भी रिकॉर्ड दर्ज किया गया है।
हरियाणा में धान की कटाई के बाद खेतों में बचे फसल अवशेषों को जल्दी सेफ करने के लिए कुछ किसान पराली जलाते हैं। इसमें वायु प्रदूषण के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण पर भी असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
सरकार का फोकस: पराली जलाने पर रोक
प्रस्तावित रेड एंट्री व्यवस्था को सरकार की पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ किसानों की फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनें और अन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पराली जलाने पर कार्रवाई का प्रावधान सख्त किया जा रहा है।
अब प्रस्तावित मसौदे के तय होने के बाद यह देखना होगा कि 15 महीने की रेड एंट्री और फसल बिक्री से जुड़ी पाबंदियों को किसानों पर कितना असर पड़ता है और इससे पराली जलाने की घटनाओं में कितनी कमी आती है।

