Yuva Haryana: हरियाणा की अनाज मंडियों में धान की आवक और खरीद के बीच मौसम ने एक बार फिर किसानों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश में अगले 2 दिनों तक तेज हवाओं, आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी करते हुए ऑरेंज अलर्ट घोषित किया है।
हाल ही में 10-11 और 11-12 अक्टूबर को हुई बारिश के कारण मंडियों में पड़ा लाखों टन धान भीग गया था। अब दोबारा बारिश की संभावना से खुले आसमान के नीचे पड़ा 7.28 लाख टन धान भीगने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
मौसम विभाग की चेतावनी और अलर्ट
आईएमडी (IMD) चंडीगढ़ के निदेशक डॉ. सुरेंद्र पाल के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के कारण मौसम में यह बदलाव आ रहा है।
चेतावनी: 14 और 15 अक्टूबर को 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, बारिश होने और ओलावृष्टि की संभावना है।
आंकड़ों की नज़र से: मंडियों का हाल
कुल किसान व आवक: प्रदेश की मंडियों में अब तक 1.63 लाख किसान 19.56 लाख टन पीआर धान लेकर पहुंच चुके हैं।
खरीद का आंकड़ा: इनमें से 1.44 लाख किसानों से 12.28 लाख टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है।
खुले में पड़ा धान: 19 हजार किसानों का 7.28 लाख टन धान बिना बिके मंडियों में पड़ा हुआ है, जिस पर बारिश का सीधा खतरा है।
उठान की स्थिति: मंडियों से अब तक केवल 6.15 लाख टन धान का उठान हो पाया है, जबकि 13.41 लाख टन धान अभी भी मंडियों में ही रखा है। (इसमें 7.28 लाख टन किसानों का और 6.13 लाख टन सरकारी एजेंसियों का धान शामिल है)।
भुगतान: धान बिक्री के बाद 62 हजार किसानों को फसल के बदले 1200 करोड़ रुपये की पेमेंट जारी की जा चुकी है।
हाईवे पर सुखा रहे धान, ट्रायल प्रभावित
पिछली बारिश में भीगे धान को सुखाने के लिए किसान कुरुक्षेत्र में नवनिर्मित जलबेहड़ा-शाहबाद नेशनल हाईवे-152जी की सड़कों का सहारा ले रहे हैं। किसान हाईवे के किनारों पर धान फैलाकर उसे सुखाने के प्रयास में लगे हुए हैं, जिससे हाईवे पर वाहनों का ट्रायल भी प्रभावित हो रहा है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के कड़े निर्देश
हालात की गंभीरता को देखते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फसल खरीद से जुड़े विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और निम्नलिखित दिशा-निर्देश जारी किए:
- वैकल्पिक स्थानों का चयन: मंडियों के अलावा उपयुक्त खुले स्थानों को भी चिह्नित किया जाए, ताकि किसानों की फसल को सुरक्षित रखा जा सके।
- सुरक्षा एवं सुविधाएं: चिह्निात खुले स्थानों पर किसानों के लिए आवश्यक सुविधाएं और फसल को ढकने/सुरक्षित रखने के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
- उठान में तेजी: बारिश से फसल को नुकसान न पहुंचे और मंडियों से धान का उठान बिना किसी बाधा के तेजी से हो।
- आपसी तालमेल: सभी अधिकारी आपसी तालमेल से काम करें ताकि किसानों को किसी प्रकार का इंतजार न करना पड़े और खरीद प्रक्रिया सुचारू रहे।

